
Jamshedpur : टाटा स्टील में हालिया वेज रिवीजन समझौते के लागू होने के बाद पहली बार महंगाई भत्ता (डीए) में संशोधन किया गया है। संशोधित डीए के आंकड़े सामने आने के बाद न्यू सीरीज (एनएस) के कर्मचारियों के बीच असंतोष की स्थिति बनती दिख रही है। कर्मचारियों का कहना है कि ओल्ड सीरीज की तुलना में न्यू सीरीज में डीए बढ़ोतरी का लाभ काफी कम है और मौजूदा महंगाई को देखते हुए 636 रुपये की मासिक वृद्धि पर्याप्त नहीं है।
बेसिक पे अलग होने के कारण डीए में भी अलग-अलग राशि का इजाफा
वेज रिवीजन के बाद स्टील वेज स्ट्रक्चर यानी ओल्ड सीरीज (ओएस) के कर्मचारियों के लिए वैरिएबल डीयरनेस अलाउंस (वीडीए) में 2.20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। ग्रेड के अनुसार बेसिक पे अलग होने के कारण डीए में भी अलग-अलग राशि का इजाफा हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार ओएस-1 में 1,893 रुपये से लेकर ओएस-12 में 3,003 रुपये तक की मासिक वृद्धि हुई है।
वहीं, न्यू सीरीज के कर्मचारियों के लिए डीए की गणना अलग फॉर्मूले से होती है। एनएस ग्रेड में वीडीए में 212 प्वाइंट की बढ़ोतरी हुई है। प्रति प्वाइंट तीन रुपये की दर से गणना करने पर यह 636 रुपये प्रतिमाह बैठती है। खास बात यह है कि एनएस-01 से एनएस-12 तक सभी ग्रेड के कर्मचारियों के लिए यह वृद्धि समान है।
ग्रेड के अंतर पर उठ रहे सवाल
न्यू सीरीज के कर्मचारियों के बीच मुख्य सवाल यह है कि शुरुआती और उच्च ग्रेड के कर्मचारियों के डीए में समान 636 रुपये की बढ़ोतरी क्यों की गयी। कर्मचारियों का तर्क है कि जिम्मेदारी, ग्रेड और अनुभव के अंतर को डीए की गणना में भी प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए।
ओल्ड सीरीज में प्रतिशत आधारित गणना होने के कारण उच्च ग्रेड के कर्मचारियों को अधिक राशि का लाभ मिला है। इसके विपरीत न्यू सीरीज में फिक्स्ड प्वाइंट आधारित व्यवस्था के कारण सभी ग्रेड को समान राशि मिली है। इसी अंतर को लेकर कर्मचारियों के बीच डीए फॉर्मूले की समीक्षा की मांग उठ रही है।
महंगाई के अनुरूप बढ़ोतरी की मांग
कर्मचारियों का कहना है कि वेज रिवीजन के बाद डीए में पहली संशोधन से उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर राहत की उम्मीद थी। उनका मानना है कि मौजूदा महंगाई के दौर में 636 रुपये की मासिक वृद्धि सीमित राहत देती है। कर्मचारियों के एक वर्ग का कहना है कि भविष्य में डीए निर्धारण की व्यवस्था में ग्रेड और बेसिक पे के अनुरूप अंतर को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि सभी कर्मचारियों को उनकी वेतन संरचना के अनुसार लाभ मिल सके।

