Home » JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की सरकार को दो टूक,18 अक्टूबर तक लाएं परीक्षा सुधार, वरना राज्य में होगी बड़ी छात्र महापंचायत

JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की सरकार को दो टूक,18 अक्टूबर तक लाएं परीक्षा सुधार, वरना राज्य में होगी बड़ी छात्र महापंचायत

छात्र नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकार के पास परीक्षा व्यवस्था में सुधार लागू करने के लिए केवल 18 अक्टूबर तक का समय है।

by Kanchan Kumar
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची : ​झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में धांधली और सुधार के मुद्दे को लेकर छात्रों का गुस्सा एक बार फिर उफान पर है। राजधानी रांची में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्र नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकार के पास परीक्षा व्यवस्था में सुधार लागू करने के लिए केवल 18 अक्टूबर तक का समय है। यदि तय समय सीमा तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो उसी दिन पूरे राज्य के छात्रों की एक विशाल छात्र महापंचायत बुलाई जाएगी, जिसमें आगे के बड़े आंदोलन का फैसला होगा।

परीक्षाएं रद्द करना काफी नहीं, पहले सुधार फिर नई भर्तियां

​पत्रकारों से बातचीत करते हुए छात्र नेता रविंद्र पासवान ने कहा कि उनकी मुख्य मांगें तीन थीं- विवादित परीक्षाएं रद्द करना, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और परीक्षा प्रणाली में स्थायी सुधार लाना। सरकार ने पुरानी परीक्षाएं रद्द तो कर दीं, लेकिन सुधार की दिशा में दो महीने बीत जाने के बाद भी कोई जमीनी काम शुरू नहीं किया है। मंच का स्पष्ट कहना है कि जब तक पूरे सिस्टम को पारदर्शी नहीं बनाया जाता, तब तक कोई भी नई बहाली जारी न की जाए, वरना पुरानी समस्याएं फिर सामने आएंगी।

ये हैं ​मंच की प्रमुख मांगें

​छात्र मंच ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कई बिंदु रखे हैं। परीक्षाएं किसी भी निजी या बाहरी आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए न कराई जाएं। परिणाम जारी करने के साथ ही अभ्यर्थियों के स्कोर कार्ड और कट-ऑफ मार्क्स भी सार्वजनिक किए जाएं। रिफॉर्म के लिए बनने वाली सरकारी कमिटी में छात्र प्रतिनिधियों को भी जगह मिले।

​इसके साथ ही, रविंद्र पासवान ने 7 अक्टूबर को कुछ लोगों द्वारा घोषित किए गए महाजुटान की खबरों को अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मंच 18 अक्टूबर तक पूरी तरह से सरकार के रुख का इंतजार करेगा।

​ जांच की धीमी रफ्तार पर उठाए सवाल

​मंच ने 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सीबीआई जांच की पीआईएल और 7 अक्टूबर को झारखंड हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। रविंद्र पासवान का आरोप है कि सरकार सीबीआई जांच रोकने के लिए तो सुप्रीम कोर्ट में पूरी ताकत लगा रही है, लेकिन हाईकोर्ट के सामने तथ्य सही से नहीं रख रही।

​उन्होंने सीआईडी की ढीली जांच पर तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार ने खुद माना है कि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, तो अब तक सिर्फ 36 गिरफ्तारियां ही क्यों हुई हैं? प्रश्नपत्र लीक करने वाले असली मास्टरमाइंड और जिम्मेदार अफसरों से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही?
​
​छात्र प्रतिनिधि पीयूष और कुणाल प्रताप ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले निर्दोष छात्रों पर दर्ज की गई एफआईआर को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। साथ ही, जेपीएससी में अध्यक्ष व सदस्यों की जल्द नियुक्ति की जाए।

​कुणाल प्रताप ने निशाना साधते हुए कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का सिर्फ ऐलान हुआ, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं दिखा। अमिताभ कौशल के नेतृत्व में गठित कमेटी की आज तक एक भी बैठक नहीं हुई और न ही जेएसएससी के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की गई। मंच ने दोहराया कि राज्य की सभी 22 रद्द परीक्षाओं में निष्पक्षता के लिए सीबीआई जांच ही एकमात्र रास्ता है और सरकार को 18 अक्टूबर से पहले इस पर गंभीर फैसला लेना ही होगा।
Read Also:  Jharkhand Police : सिपाही बनने का सुनहरा मौका, दो चरणों में होगी बहाली, मुख्यालय ने जिलों से मांगी खाली पदों की लिस्ट

 

Related Articles

Leave a Comment