
रांची: प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एससी-एसटी मामले में जवाब दाखिल करने में हो रही देरी पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पक्ष द्वारा बार-बार अतिरिक्त समय मांगे जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया है।
न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई। प्रतिवादी सीएम हेमंत सोरेन पक्ष की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए एक बार फिर मोहलत मांगी गई थी। कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन कार्यवाही में हो रही देरी को देखते हुए 10 हजार रुपये की पेनाल्टी लगा दी। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि तय समय-सीमा के भीतर ही हर हाल में जवाब दाखिल किया जाए। यह जुर्माने की राशि ‘झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी’ में जमा करने का आदेश दिया गया है।
क्या है पूरी कानूनी लड़ाई
यह पूरा विवाद जमीन घोटाले से जुड़ी जांच के दौरान शुरू हुआ था। उस समय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया गया था कि जांच एजेंसी के अधिकारी उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं और संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रहे हैं।
अफसरों की याचिका पर 2 नवंबर को अगली सुनवाई
ईडी के अधिकारियों ने अपने खिलाफ दर्ज इस एफआईआर को पूरी तरह रद्द करने की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने पूर्व में ही मामले पर सुनवाई करते हुए ईडी अधिकारियों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक या पीड़क कार्रवाई करने पर रोक लगा रखी है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार के अनुसार, अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होगी।
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