
Jamshedpur : बिष्टुपुर स्थित P&M मॉल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। टाटा स्टील ने मॉल संचालक पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को बकाया लीज रेंट और रोड सेस का भुगतान करने के लिए अंतिम 15 दिन का समय दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि तय अवधि में 2,23,86,000 रुपये की पूरी बकाया राशि जमा नहीं की गई तो सबलीज की स्वीकृति रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। टाटा स्टील के भूमि प्रबंधन विभाग के प्रमुख आनंद कुमार ने इस संबंध में कंपनी के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी नितेश कुमार को पत्र भेजा है। कंपनी के अनुसार बकाया राशि वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2014-15 की है। इसमें निर्धारित लीज रेंट के साथ 25 प्रतिशत रोड सेस भी शामिल है।
15 दिनों में जमा करनी होगी पूरी रकम
टाटा स्टील ने पत्र में कहा है कि नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर पूरी बकाया राशि का भुगतान करना होगा। कंपनी के मुताबिक बकाया भुगतान के लिए पहले भी कई बार पत्राचार किया गया है और पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर से अपना पक्ष भी रखा गया, लेकिन अब तक रकम जमा नहीं की गई है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर सबलीज समाप्त करने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इसके बाद संबंधित जमीन को दोबारा अपने अधिकार में लेने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इस कार्रवाई में होने वाले जोखिम और खर्च की जिम्मेदारी भी संबंधित सबलीज धारक की होगी।
छह महीने से अधिक बकाया पर सबलीज खत्म करने का प्रावधान
टाटा स्टील ने 7 मार्च 2008 को हुए लीज समझौते की शर्तों का भी हवाला दिया है। समझौते के अनुसार सबलीज धारक को निर्धारित दर से किराया और सेस साल में दो बार जमा करना था। भुगतान के लिए 6 जनवरी और 6 जुलाई की समय सीमा तय थी। देरी होने पर निर्धारित दर से ब्याज का भी प्रावधान है। लीज समझौते की धारा 6.1.3 में कहा गया है कि यदि किराया, सेस या अन्य देय राशि छह महीने से अधिक समय तक बकाया रहती है और मामला वास्तविक मध्यस्थता प्रक्रिया में नहीं है, तो टाटा स्टील सबलीज समाप्त कर सकती है। ऐसी स्थिति में संबंधित जमीन को दोबारा अपने अधिकार में लेने का अधिकार भी कंपनी के पास है।
120 प्रतिशत तक के अन्य सेस का मामला सुप्रीम कोर्ट में
टाटा स्टील ने यह भी स्पष्ट किया है कि लीज रेंट से जुड़े 120 प्रतिशत तक के अन्य सेस का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए इस राशि को मौजूदा 2.23 करोड़ रुपये की बकाया मांग में शामिल नहीं किया गया है। कंपनी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस मद में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
2007 की सरकारी मंजूरी और हाईकोर्ट के आदेश का हवाला
कंपनी ने अपनी कार्रवाई के समर्थन में झारखंड सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से 8 जून 2007 को जारी पत्र का भी उल्लेख किया है। इसमें सबलीज की मंजूरी वार्षिक किराया और सेस के नियमित भुगतान की शर्त पर दी गई थी। बकाया की वसूली के लिए पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट के तहत कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया था। टाटा स्टील ने यह भी कहा है कि झारखंड हाईकोर्ट ने 22 जुलाई 2025 को इस मामले से संबंधित आदेश जारी किया था। कंपनी के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश और लीज समझौते में तय शर्तों के आधार पर पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर से उठाई गई आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया गया है। अब सबकी निगाहें 15 दिन की समय सीमा पर हैं। यदि निर्धारित अवधि में पूरी बकाया राशि जमा नहीं होती है, तो सबलीज रद्द करने और जमीन वापस लेने की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में बिष्टुपुर स्थित P&M मॉल का संचालन भी प्रभावित होने की आशंका है।

