
जमशेदपुर : साहित्य कला फाउंडेशन की ओर से साहित्यिक महाकुंभ ‘छाप’ का तीसरा संस्करण 9-10 अक्टूबर को होने जा रहा है, जिसमें देश के नामचीन हस्ताक्षरों का जुटान होगा। दो दिवसीय आयोजन का उद्घाटन सत्र 09 अक्टूबर को सुबह 10 बजे बिष्टुपुर स्थित होटल अलकोर में होगा। पूर्व सूचना आयुक्त बैजनाथ मिश्रा की अध्यक्षता में होने वाले उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि प्रो. के. वनजा होंगी। इस दौरान उनके साथ ख्यात कहानीकार पंकज मित्र और ख्यात आलोचक राकेश बिहारी बतौर विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के दूसरे दिन चर्चित गीतों के साथ डॉ. सागर भी मौजूद रहेंगे।
इस वर्ष भी, पुस्तक आधारित चर्चा को समर्पित, झारखंड का अपनी तरह का सबसे अलग आयोजन होगा। इस वर्ष के आयोजन में युगल जोशी, प्रशांत आनंद, प्रमोद कुमार सिंह, सत्य व्यास, विमल चंद्र पांडेय, मनोज राजन त्रिपाठी, विनीता अस्थाना, कविता, खालिद जावेद, रंजन कुमार त्रिपाठी, पंकज दुबे की हिंदी, उर्दू, संस्कृत और अंग्रेजी भाषा की पुस्तकों पर आधारित बातचीत के सत्र तथा आदिवासी साहित्य में स्त्री, एआई युग में खबरें और विश्वसनीयता का संकट तथा सूचना क्रांति के दौर में सूचना के अधिकार की प्रासंगिकता जैसे विषयों पर बातचीत के सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में पद्मश्री डॉ. दमयंती बेसरा, झारखंड के राज्य सूचना आयुक्त अनुज कुमार सिन्हा, पूर्व सूचना आयुक्त बैजनाथ मिश्र समेत निर्मला पुतुल मुर्मू और झारखंड से प्रकाशित होने वाले विभिन्न समाचार-पत्रों के संपादक विद्वत चर्चा करेंगे। कार्यक्रम के अन्य आकर्षणों में हिमांशु बाजपेई की किस्सागोई, भूपेंद्र सिंह खिड़िया की तबला पोयट्री और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली संताली फिल्म ‘आँगेन’ की स्क्रीनिंग भी होगी।
यहां बता दें कि छाप के पहले और दूसरे संस्करण में पुष्पेश पंत, उदय प्रकाश, पुरुषोत्तम अग्रवाल, रणेन्द्र, रामदेव शुक्ल, मृत्युंजय कुमार सिंह, यतीश कुमार, गौर हरि दास, बिनि षाडंगी, महुआ माजी, गरिमा श्रीवास्तव, कुंदन यादव, सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज, अखिलेन्द्र मिश्र, उपासना, प्रो. अच्युत चेतन, डेविड एनशन, जेरी पिन्टो, बीना ठाकुर, प्रबाल कुमार बसु, भोगला सोरेन, जोबा मुर्मू जैसे हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला, मैथिली, भोजपुरी, ओड़िया, संताली, हो आदि भाषाओं के विश्वप्रसिद्ध विद्वानों की पुस्तकों पर चर्चा के सत्र आयोजित किए गए थे।
विगत वर्षों में ख्यात लेखकों और साहित्यकारों की पुस्तकों पर आधारित चर्चा के सत्रों ने झारखंड के कई महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को पुस्तकों से जुड़ने, पुस्तकें पढ़ने और सवाल पूछने को प्रेरित किया है। इस वर्ष भी साहित्य कला फाउंडेशन ने राज्य के साहित्यकारों=साहित्यप्रेमियों से उत्साहपूर्वक सहभागी बनने का आग्रह किया है।

