
Jamshedpur : जामदा पंचायत के पोड़ा-भालकी में मुंडा स्वशासन व्यवस्था संघ, पोटका प्रखंड की ओर से करम मिलन समारोह एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पोटका विधायक संजीव सरदार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा, मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा और वीर शहीद गंगा नारायण सिंह की तस्वीरों पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद विधायक ने करम पूजा में हिस्सा लिया और क्षेत्रवासियों को करम पर्व की शुभकामनाएं दीं।
करम पर्व प्रकृति और सामाजिक एकता का प्रतीक
समारोह को संबोधित करते हुए संजीव सरदार ने कहा कि करम पर्व आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। यह पर्व गीत, नृत्य, पूजा और सामूहिक सहभागिता के जरिए लोगों को एक-दूसरे से जोड़ता है।
उन्होंने कहा कि करम की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। इसे आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
संस्कृति हमारी पहचान, जड़ों से जुड़े रहें युवा
विधायक ने कहा कि मुंडा समाज की पहचान उसकी परंपरा, प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली, सामाजिक अनुशासन और सामुदायिक भावना से है। आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी भाषा, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति को समझने और उसे आगे बढ़ाने की अपील की। कहा कि करम मिलन जैसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
पोटका की ताकत है सामाजिक एकता
संजीव सरदार ने कहा कि पोटका में विभिन्न समाज और समुदाय लंबे समय से आपसी भाईचारे और सहयोग के साथ रहते आए हैं। एक-दूसरे के पर्व-त्योहार में शामिल होना और सुख-दुख में साथ खड़ा होना यहां की सामाजिक परंपरा रही है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास में सभी समाजों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। सामाजिक एकता को मजबूत बनाकर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर माहौल तैयार किया जा सकता है।
बिरसा और जयपाल सिंह मुंडा के संघर्ष को किया याद
विधायक ने भगवान बिरसा मुंडा, जयपाल सिंह मुंडा और क्षेत्र के वीर शहीदों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों ने समाज के अधिकार, स्वाभिमान और पहचान के लिए संघर्ष किया। उनका जीवन और विचार आज भी युवा पीढ़ी को प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने आयोजकों से पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य और रीति-रिवाजों को संरक्षित करने के लिए ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम लगातार आयोजित करने की अपील की।
कार्यक्रम में माधव सिंह मुंडा, दुर्गा मुंडा, संजय मुंडा, गोपाल मुंडा, जितेन मुंडा, भूदेव मुंडा, बंकिन मुंडा, जय हरि मुंडा, उमेश मुंडा, समेश मुंडा, मंगल सिंह मुंडा, शिवनाथ सिंह, गिलिप मुंडा, सुखीराम मुंडा, संजीत मुंडा, कोनू मुंडा, अतुल मुंडा, प्रदीप मुंडा और देवू मुंडा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

