
चाईबासा : भारतीय जनता पार्टी के तत्वावधान में आज पद्मावती सरस्वती शिशु मंदिर में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ विषय पर राष्ट्रीय चिंतन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों, बुद्धिजीवियों एवं प्रबुद्धजनों ने भाग लिया। संवाद के दौरान लोकतंत्र की मजबूती, संविधान की गरिमा, संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था, मतदाता सूची की शुद्धता तथा देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने, संवैधानिक व्यवस्थाओं के महत्व को रेखांकित करने तथा नागरिकों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति सजग बनाने पर केंद्रित रहा। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए संवैधानिक संस्थाओं में जनता का विश्वास, कानून का शासन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन भी आवश्यक है।
लोकतंत्र संविधान और नागरिकों के विश्वास पर आधारित व्यवस्था : गीता कोड़ा
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता पूर्व सांसद एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष गीता कोड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संविधान, संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, नागरिक अधिकारों और जनता के विश्वास पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है। लोकतंत्र को सशक्त बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि सभी संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किया जाए और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति जनता का विश्वास बना रहे।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन विरोध के नाम पर भ्रम और अराजकता की स्थिति उत्पन्न करना उचित नहीं है। प्रत्येक नागरिक को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ राष्ट्रीय कर्तव्यों का भी ईमानदारी से निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों से जिम्मेदारीपूर्वक अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
आपातकाल का दौर लोकतंत्र के महत्व की याद दिलाता है : मधु कोड़ा
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि भारत का लोकतंत्र अनेक संघर्षों, त्याग और बलिदानों के परिणामस्वरूप मजबूत हुआ है। देश का लोकतांत्रिक इतिहास हमें यह सीख देता है कि नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना कितना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने आपातकाल के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि जब लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया जाता है, तब लोकतंत्र की वास्तविक परीक्षा होती है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सजग रहना चाहिए और संविधान द्वारा स्थापित मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए जनजागरूकता और नागरिक सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया।
निष्पक्ष संस्थाएं लोकतंत्र में जनता के विश्वास का आधार : जे.बी. तुबिद
पूर्व आईएएस अधिकारी एवं भाजपा नेता जे.बी. तुबिद ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती निष्पक्ष संस्थाओं, कानून के शासन और संवैधानिक प्रक्रियाओं के प्रभावी पालन पर निर्भर करती है। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका लोकतांत्रिक व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी निष्पक्षता और कार्यप्रणाली के प्रति जनता का विश्वास लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन इन मतभेदों के बावजूद संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और कानून के प्रति सम्मान बनाए रखना आवश्यक है। लोकतंत्र में सभी पक्षों को संवैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप अपनी बात रखने और असहमति व्यक्त करने का अधिकार है।
लोकतंत्र की रक्षा समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी : गीता बालमुचू
भाजपा जिलाध्यक्ष गीता बालमुचू ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा केवल सरकार या राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान है। एक जागरूक नागरिक ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि जनता को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए तथा किसी भी प्रकार की अफवाह, भ्रम या राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न करने वाले प्रयासों को तथ्यों के आधार पर समझना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक व्यवहार और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य नागरिकों एवं प्रबुद्धजनों ने भी विषय पर अपने विचार साझा किए। संवाद के दौरान लोकतंत्र के समक्ष वर्तमान चुनौतियों, चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और नागरिकों की जिम्मेदारियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा हुई।
वक्ताओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नागरिकों की जागरूकता, संवैधानिक प्रक्रियाओं के प्रति सम्मान और संस्थाओं में जनता का विश्वास लोकतंत्र की मजबूती के प्रमुख आधार हैं। कार्यक्रम के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण तथा संवैधानिक मर्यादाओं के पालन का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का मंच संचालन जिला महामंत्री भूषण पाट पिंगुआ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन जिला उपाध्यक्ष रंजन प्रसाद ने किया।

