
Jamshedpur : झारखंड में ‘युद्ध का नगाड़ा’ बज गया है। बंगाल की खाड़ी में बादलों की सेनाएं लामबंदी में जुटी हैं। हालांकि, इसकी रणभूमि आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु है। मगर, सेना का हरावल दस्ता झारखंड तक पहुंच चुका है। भगवान भास्कर दिन भर बादलों की ओट से ही हालात पर नजर रखे रहे। कोल्हान में सोमवार को दिन भर मौसम ठंडा रहा। हम बात कर रहे हैं बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ की। इसके प्रभाव के कारण झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में सोमवार को मौसम में तब्दीली देखी गई। आसमान में दिन भर बादल छाए रहे और सूर्य देवता का दर्शन दुर्लभ रहा ।
हाल ही में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के बाद अब मुरासु के सक्रिय होने से मौसम लगातार बदल रहा है। हालांकि, मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक झारखंड पर इस तूफान का सीधा या व्यापक असर पड़ने की संभावना बेहद कम है। इसके बावजूद राज्य के कई हिस्सों में अगले दो से तीन दिनों तक बादल छाये रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
गौरतलब है कि इस चक्रवात का नाम भारत के मौसम वैज्ञानिकों ने रखा है। मुरासु तमिल भाषा का शब्द है। इसका मतलब होता है युद्ध का नगाड़ा।
कोल्हान में दिख सकता है ज्यादा असर
मौसम विभाग की ओर से सोमवार को जारी पूर्वानुमान के अनुसार, झारखंड के दक्षिणी, मध्य और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल सकता है। इसका अपेक्षाकृत अधिक असर कोल्हान के जिलों में देखने को मिल सकता है।
पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में बादल छाये रहने के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा रांची, खूंटी, गुमला, लोहरदगा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह और कोडरमा में भी मौसम प्रभावित रह सकता है। इन कोल्हान में सोमवार से ही इसका असर दिखा। दिन भर बादल छाए रहे। शाम को बूंदा-बांदी भी हुई। दिन भर धूप नहीं निकली। तीन नवंबर तक बारिश के आसार, चार से घटेगी गतिविधि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, दो नवंबर को राज्य के दक्षिणी, मध्य और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। तीन नवंबर को भी दक्षिणी और मध्य झारखंड में कहीं-कहीं बारिश या मेघ गर्जन की संभावना है। चार नवंबर को मुख्य रूप से दक्षिणी झारखंड में बादल छाये रहने और हल्की बारिश के आसार हैं। इसके बाद पांच और छह नवंबर को सुबह के समय कुहासा या धुंध देखने को मिल सकती है। हालांकि, इन दिनों आसमान मुख्यतः साफ रहने का अनुमान है।
संताल परगना के जिलों में भी बदल सकता है मौसम
मुरासु के प्रभाव से संताल परगना के देवघर, दुमका, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज में भी बादल छाने और हल्की बारिश की संभावना जतायी गयी है। वहीं, पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार में तूफान का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहने का अनुमान है। झारखंड के लिए भारी बारिश या तूफानी हवा का अलर्ट नहीं राहत की बात यह है कि मौसम विभाग ने झारखंड के लिए मुरासु के कारण किसी बड़े चक्रवाती खतरे की चेतावनी जारी नहीं की है। राज्य में तेज चक्रवाती हवाएं चलने या व्यापक स्तर पर भारी बारिश होने का फिलहाल अनुमान नहीं है। इसका असर मुख्य रूप से बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश के रूप में दिखाई दे सकता है। दो नवंबर को जारी मौसम रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटे के दौरान राज्य में कुछ स्थानों पर गरज के साथ बहुत हल्की से हल्की बारिश दर्ज की गयी। इस दौरान हजारीबाग के हेंडीगीर में सर्वाधिक 10.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गयी। आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा मुरासु मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, चक्रवाती तूफान मुरासु पश्चिम-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में सक्रिय है।
सोमवार की सुबह यह तूफान करीब 22 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा था। इसके आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और नरसापुर के बीच तट पार करने का अनुमान जताया गया है। तटीय आंध्र प्रदेश और उत्तरी तमिलनाडु के लिए चक्रवात से संबंधित गंभीर चेतावनी जारी की गयी है। झारखंड में फिलहाल सीमित रहेगा तूफान का प्रभाव मुरासु का सीधा रास्ता झारखंड से होकर नहीं गुजर रहा है। ऐसे में राज्य में किसी बड़े तूफानी खतरे की आशंका नहीं है। हालांकि, चक्रवात से जुड़ी मौसमी परिस्थितियों के कारण बादल और बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, चार नवंबर के बाद झारखंड में बारिश की गतिविधियों में कमी आने की संभावना है।

