चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के बड़ाजामदा फुटबॉल मैदान के पास 1 एकड़ 19 डिसमिल जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद गहरा गया। शुक्रवार को मामला तब तनावपूर्ण हो गया जब एक पक्ष ने बुलडोजर से जमीन की सफाई शुरू की। विरोध में बड़ी संख्या में लोग जुटे और दोनों पक्ष थाना पहुंच गए।
चार पीढ़ियों से दफनाते हैं शव : आदिवासी समाज
हो आदिवासी समाज के लोगों का आरोप है कि विवादित जमीन का उपयोग वे चार पीढ़ियों से श्मशान घाट के रूप में कर रहे हैं। यहां उनके पूर्वजों के शव दफनाए जाते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि दूसरे पक्ष द्वारा अचानक बुलडोजर चलाकर जमीन समतल की जा रही थी और उसे निजी संपत्ति बताया जा रहा था। महिलाओं समेत सैकड़ों लोगों ने मौके पर पहुंचकर काम रुकवाया।
1976 की रजिस्ट्री, टैक्स भी देते हैं : मनोज वर्मा
दूसरे पक्ष के मनोज वर्मा ने जमीन को अपनी पुश्तैनी संपत्ति बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1976 में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी और वे लगातार मालगुजारी टैक्स भी जमा कर रहे हैं। सभी वैध दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। वर्मा के मुताबिक जमीन की मापी के बाद बाउंड्री वॉल बनाने के लिए सफाई कराई जा रही थी, तभी महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया।
ग्रामसभा पर जमीन हड़पने का आरोप
मनोज वर्मा ने आरोप लगाया कि बड़ाजामदा मुखिया दिगंबर चातोम्बा की अध्यक्षता में हो आदिवासी समाज के लोगों ने ग्रामसभा कर उनकी जमीन छीनने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि वे अपनी जमीन किसी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे और जरूरत पड़ने पर कोर्ट जाएंगे।
पुलिस ने कहा- राजस्व का मामला
बड़ाजामदा थाना पुलिस ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विवाद को राजस्व विभाग से जुड़ा बताया। पुलिस ने दोनों पक्षों को अंचल अधिकारी के पास लिखित आवेदन देने की सलाह दी। साथ ही शांति बनाए रखने और किसी तरह की मारपीट न करने की अपील की। फिलहाल दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर घर भेज दिया गया है। इलाके में तनाव को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।
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