
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सेल के किरीबुरू-मेघाहातुबुरु जनरल अस्पताल में करीब दो साल से ब्लड बैंक का लाइसेंस नहीं होने के कारण रक्त सेवा बंद पड़ी है। इससे सारंडा के गरीब और गंभीर ग्रामीण मरीजों के साथ ही सेल कर्मियों और आसपास की खदानों में काम करने वाले श्रमिकों को काफी परेशानी हो रही है। आपात स्थिति में खून की जरूरत पड़ने पर मरीजों को टाटा स्टील नोवामुंडी अस्पताल या अन्य अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है।
अक्टूबर 2024 से बंद है ब्लड बैंक
जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी ने बताया कि अस्पताल का ब्लड बैंक अक्टूबर 2024 से लाइसेंस के अभाव में बंद है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय से इतनी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा का बंद रहना गंभीर चिंता का विषय है। खून के लिए मरीजों को दूर भेजे जाने से इलाज में देरी हो रही है और गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
ब्लड बैंक की सभी प्रक्रियाएं जल्द पूरी कर रक्त सेवा शुरू करने की मांग
इसी समस्या को लेकर देवकी कुमारी ने किरीबुरू पश्चिम पंचायत की मुखिया पार्वती कीड़ो, मेघाहातुबुरु उत्तरी पंचायत की मुखिया लिपि मुंडा, मेघाहातुबुरु दक्षिण पंचायत की मुखिया प्रफ्फुलित ग्लोरिया टोपनो, सामाजिक कार्यकर्ता संतोष पंडा और सोनाराम गोप ने किरीबुरू के सीजीएम पी.एम. शिरपुरकर और अस्पताल प्रबंधन से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ब्लड बैंक की सभी प्रक्रियाएं जल्द पूरी कर रक्त सेवा शुरू करने की मांग की।
अक्टूबर के अंत तक ब्लड बैंक को दोबारा चालू कराने का दिलाया भरोसा
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि ब्लड बैंक को दोबारा चालू करने के लिए एलिजा मशीन की व्यवस्था और ब्लड बैंक कक्ष में जरूरी बदलाव सहित कुछ प्रक्रियाएं पूरी करनी हैं। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार सीजीएम पी.एम. शिरपुरकर ने जरूरी कार्यों को बजट में शामिल कर अक्टूबर के अंत तक पूरा कराने का भरोसा दिया है।
गंभीर मरीज को तत्काल खून उपलब्ध नहीं होना चिंता की बात
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि किरीबुरू-मेघाहातुबुरु अस्पताल क्षेत्र का महत्वपूर्ण रेफरल अस्पताल है। आसपास की खदानों में हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ऐसे में गंभीर मरीज को तत्काल खून उपलब्ध नहीं होना चिंता की बात है। उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त से हस्तक्षेप कर ब्लड बैंक जल्द शुरू कराने की मांग की है। साथ ही सारंडा क्षेत्र में डीएमएफटी सहित विभिन्न माध्यमों से प्राप्त राजस्व का उपयोग स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और जरूरत पड़ने पर कम से कम 100 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल बनाने की मांग की, जिसमें ब्लड बैंक, आपातकालीन चिकित्सा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा हो।

