
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में वर्षों से खंडहर में तब्दील हो चुके जर्जर और खतरनाक स्कूल भवनों को जमींदोज करने का काम आरंभ हो चुका है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उपायुक्त मनीष कुमार ने जिले के विभिन्न प्रखंडों में चिह्नित कुल 254 जर्जर भवनों को एक सप्ताह के भीतर पूरी तरह ध्वस्त करने का सख्त निर्देश दिया है, जिसके बाद से प्रशासनिक अमले और संबंधित विभागों में हलचल तेज हो गई है।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इन पुराने और जर्जर ढांचों को गिराने के बाद वहां से निकलने वाले मलबे, ईंटों, लोहे के सरिये और अन्य अवशेष सामग्रियों की नीलामी या बिक्री की जाएगी। इससे प्राप्त होने वाली पूरी राशि को संबंधित विद्यालयों के विकास और पुनरुद्धार कार्य में ही लगाया जाएगा।
किस प्रखंड में कितने भवन होंगे ध्वस्त?
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में सबसे बुरी स्थिति गोइलकेरा प्रखंड की है, जहां सबसे अधिक 48 जर्जर भवनों को तोड़ा जाना है। अन्य प्रखंडों की स्थिति इस प्रकार है।
1 बंदगांव: 34 भवन
2 चक्रधरपुर: 31 भवन
3 सदर चाईबासा: 19 भवन
4 सोनुवा और मंझगांव: 16-16 भवन
5 कुमारडुंगी: 15 भवन
6 गुदड़ी: 12 भवन
7 खूंटपानी और आनंदपुर: 10-10 भवन
8 मंझारी और झींकपानी: 9-9 भवन
9 मनोहरपुर: 8 भवन
10 तांतनगर: 6 भवन
11 नोवामुंडी: 5 भवन
12 हाटगम्हरिया: 4 भवन
13 जगन्नाथपुर: 1 भवन
इन सभी जर्जर और असुरक्षित ढांचों को हटाने के बाद उन स्थानों पर नए और आधुनिक स्कूल भवनों के निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
अभिभावकों ने ली राहत की सांस
गौरतलब है कि ये जर्जर भवन पिछले कई वर्षों से उपेक्षित पड़े थे और किसी भी वक्त बड़े हादसे का सबब बन सकते थे। स्कूलों में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षकों और अभिभावकों के मन में हमेशा एक अनहोनी का डर बना रहता था। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए अपर उपायुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया था, जिसने इन 254 खतरनाक भवनों की पहचान कर इन्हें गिराने का ठोस निर्णय लिया। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से क्षेत्र के अभिभावकों ने गहरी राहत की सांस ली है।
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