
चतरा : जिले के प्रतापपुर अंचल से फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी प्रमाणपत्र जारी कराने का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। इस घटना ने अंचल कार्यालय से लेकर कॉमन सर्विस सेंटर तक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला भरही पंचायत का है। यहां के रहने वाले चंदन कुमार ने अपने कुछ निजी काम के लिए जाति, आय और आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने हेतु सीएससी संचालक अनुराग प्रजापति को व्हाट्सएप पर अपने जमीन का खतियान और लगान रसीद भेजी थी।
आरोप है कि इन्हीं निजी कागजातों का दुरुपयोग कर फर्जीवाड़ा किया गया। पड़ोसी राज्य बिहार के गया जिला निवासी राजेश चौधरी फिलहाल भरही गांव में रह रहे हैं। उनके नाम से एक नकली वंशावली तैयार कर दी गई। इस वंशावली में राजेश के पिता को चंदन के दादा का बेटा दिखा दिया गया, जबकि चंदन का साफ कहना है कि उनका राजेश के परिवार से दूर-दूर तक कोई खून का रिश्ता नहीं है।
मुखिया ने कहा- पेपर पर उनके हस्ताक्षर नहीं
इस फर्जी वंशावली पर भरही पंचायत की मुखिया सुनीता देवी के नाम का दस्तखत और मुहर भी लगाए गए हैं। जब मुखिया से बात की गई तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। स्पष्ट कहा कि ये हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि पंचायत स्तर पर जाली मुहर और फर्जी दस्तखत करने वाला गिरोह सक्रिय है।
हैरानी की बात यह है कि जिन कागजातों को बनने में आम जनता को हफ्तों चक्कर काटने पड़ते हैं, वे प्रमाण पत्र महज 12 घंटे के भीतर ऑनलाइन अप्रूव कर दिए गए। चंदन का दावा है कि बिना किसी जमीनी जांच-पड़ताल के अंचल कार्यालय से ये फर्जी सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए। बताया जा रहा है कि इन फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत लोन और सब्सिडी ऐंठने के लिए किया गया था। मामले का पर्दाफाश होने के बाद चंदन कुमार ने उपायुक्त से लिखित शिकायत कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

