RANCHI (JHARKHAND): भाजपा सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने सूर्या हांसदा एनकाउंटर को फर्जी करार देते हुए राज्य सरकार पर पत्थर माफिया को संरक्षण देने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि यह एनकाउंटर नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी, जो माफियाओं, दलालों और बिचौलियों के इशारे पर पुलिस द्वारा की गई।
उन्होंने कहा कि सूर्या हांसदा एक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता थे, जो संथाल परगना में सक्रिय पत्थर माफिया के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। उन्होंने बताया कि हांसदा पर कोई वारंट नहीं था और वह फर्जी मुकदमों से बरी हो रहे थे। ऐसे में उन्हें बिना न्यायिक प्रक्रिया के मार देना संविधान और कानून की हत्या है। मौके पर भाजपा नेता शिवपूजन पाठक, प्रतुल शाहदेव, प्रदीप सिन्हा और अशोक बड़ाइक मौजूद थे।
अनुसूचित जनजाति आयोग की रिपोर्ट में पुष्टि
उन्होंने कहा कि इस मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर उन्होंने 16 अगस्त को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को आवेदन दिया था। आयोग ने जांच के बाद गृह मंत्रालय को सीबीआई जांच की अनुशंसा भेजी है। आयोग की टीम में सदस्य निरुपम चकमा और आशा लकड़ा समेत कुल 8 लोग शामिल थे। जांच में भी पाया गया कि घटना स्थल पर कोई जंगल नहीं था, फिर भी मुठभेड़ दिखाया गया। 2 घंटे तक चली मुठभेड़ के बावजूद खून के निशान नहीं मिले। वहीं मीडिया को घटना स्थल से दूर रखा गया। बिना किसी वारंट के सूर्या को 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखा गया। इतना ही नहीं जांच अधिकारियों को पुलिस ने सहयोग नहीं किया। उन्होंने फोटो साक्ष्य भी साझा किए जिसमें गोली के निशान की जगह जलने के दाग दिखाई दे रहे हैं, जिससे मुठभेड़ की कहानी पर सवाल उठते हैं।
सड़क से सदन तक होगी लड़ाई
दीपक प्रकाश ने कहा कि जब तक सूर्या हांसदा को न्याय नहीं मिलेगा, भाजपा सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने राज्य सरकार से सीबीआई जांच की अनुशंसा, परिजनों को सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के तत्काल स्थानांतरण की मांग की।
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