RANCHI: राज्य के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में इलाज की सुविधा को अपग्रेड किया जा रहा है। आम जनता को गंभीर स्थिति में इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) और क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) के लिए अब मेडिकल कॉलेजों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। ये बातें गुरुवार को एनएचएम के मिशन डायरेक्टर शशि प्रकाश झा ने रीजनल हेल्थ कांफ्रेंस में कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राइवेट अस्पतालों की तर्ज पर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स को विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। जिसके तहत गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स में अत्याधुनिक मेडिकल सुविधाएं, ट्रेंड हेल्थ केयर स्टाफ और बेहतर ट्रीटमेंट उपलब्ध कराई जाएगी।
रांची के होटल बीएनआर चाणक्या में आयोजित रीजनल हेल्थ कॉन्फ्रेंस में राज्य भर से कई मेडिकल एक्सपर्ट, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स के बेहतरी के लिए तैयार किए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को साझा किया और इस दिशा में जल्द कार्यान्वयन की रूपरेखा पर भी चर्चा की।
आईसीयू-सीसीयू हॉस्पिटल की जरूरत
कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने बताया कि अब तक गंभीर मरीजों को आईसीयू और सीसीयू जैसी सुविधाओं के अभाव में मेडिकल कॉलेज या प्राइवेट अस्पतालों में रेफर किया जाता रहा है। जिससे न केवल इलाज में देरी होती थी बल्कि मरीजों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता था। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने यह अहम निर्णय लिया है कि अब हर डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में आईसीयू और सीसीयू की सुविधा अनिवार्य रूप से विकसित की जाएगी।
सदर हॉस्पिटल रांची बना मॉडल
एनएचएम के मिशन डायरेक्टर शशि प्रकाश झा ने बताया कि सदर हॉस्पिटल रांची को मॉडल मानते हुए राज्य के सभी डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल को उसी तर्ज पर तैयार किया जाएगा। सदर में लागू की गई बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, डिजिटल रिकॉर्ड, ट्रीटमेंट प्रक्रिया और इमरजेंसी केयर को अब अन्य जिलों में भी अपनाया जाएगा। इससे मरीजों को बेहतर सुविधाएं अपने घरों के आसपास ही मिल जाएगी। साथ ही प्राइवेट हॉस्पिटलों में होने वाले खर्च से भी राहत मिलेगी।
प्राइवेट हॉस्पिटलों जैसी सुविधाएं
मिशन डायरेक्टर ने जोर देते हुए कहा कि अब सरकारी हॉस्पिटलों में इलाज केवल करना ही लक्ष्य नहीं होगा, बल्कि गुणवत्ता, त्वरित सेवा और आधुनिक स्वास्थ्य उपकरण भी उतने ही जरूरी होंगे। इसके लिए अस्पतालों में आईसीयू और सीसीयू यूनिट, ट्रेंड नर्सिंग स्टाफ, 24X7 इमरजेंसी सेवा, मॉडर्न लाइफ सपोर्ट सिस्टम, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड सिस्टम जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
एसओपी से इलाज में आएगी एकरूपता
विभाग द्वारा तैयार एसओपी का मुख्य उद्देश्य है कि राज्य के सभी सरकारी हॉस्पिटल एक समान कुशलता और मानकों के साथ कार्य करें। जिससे कि मरीजों को हर जिले में समान स्तर की मेडिकल सर्विस मिल सके। मिशन डायरेक्टर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस योजना का क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। पहले चरण में उन जिलों के हॉस्पिटलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां आबादी अधिक और मेडिकल कॉलेज की उपलब्धता कम है।

