
चाईबासा : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की मंगलवार को चाईबासा पहुंचे। यहां उन्होंने परिसदन में जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकू और विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ परिसीमन के मुद्दे पर बैठक की। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में बंधु तिर्की ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि परिसीमन के विरोध में 30 अगस्त को रांची में आदिवासी एकता महाजुटान के बैनर तले बड़ी रैली आयोजित की जाएगी।
पूर्व मंत्री ने केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव पर हमला बोलते हुए कहा कि यदि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हुआ तो कोल्हान की 2 अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित विधानसभा सीटें घट जाएंगी और पूरे झारखंड में आदिवासियों की सीटें कम हो जाएंगी, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने याद दिलाया कि 2006-07 में गुरुजी शिबू सोरेन के नेतृत्व में परिसीमन पर रोक लगाई गई थी। अगर उसी नीति के तहत काम नहीं हुआ तो इसका जोरदार विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में बाढ़ जैसी आपदाओं के कारण झारखंड में बड़ी संख्या में बाहरी लोग आकर बस गए हैं, जिससे यहां की आबादी का संतुलन बिगड़ा है।
बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, यहां पेसा कानून और सीएनटी एक्ट लागू है। उन्होंने कहा कि अगर संसद में गृहमंत्री अमित शाह के कहे अनुसार 50 प्रतिशत के आधार पर परिसीमन लागू होता है तो झारखंड में आदिवासी सीटें 28 से बढ़कर 42 हो जाएंगी, जो न्यायसंगत होगा। लेकिन जनसंख्या के आधार पर परिसीमन हम कभी नहीं होने देंगे।
उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि खनिज संपदा से भरपूर झारखंड का गला खनिज संसाधन विधेयक लाकर घोंटा जा रहा है। इस बिल से राज्य को 15 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड के विकास के लिए केंद्र के पास राज्य का 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये बकाया है, उसे दिलाने का प्रयास करें ताकि आदिवासी योजनाओं और राज्य का विकास हो सके। स्थानीय नीति लागू करने की भी उन्होंने मांग की ताकि झारखंड के युवाओं को रोजगार मिल सके।

