
गोड्डा : जिले में हाल ही में उजागर हुई अवैध मिनी गन फैक्ट्री के मामले में नए और हैरतअंगेज मोड़ सामने आ रहे हैं। इस पूरे गैर-कानूनी कारोबार का मुख्य कर्ताधर्ता कोई घोषित अपराधी नहीं, बल्कि समाजसेवा का चोला ओढ़े एक आरटीआई एक्टिविस्ट निकला। आरोपी पवन कुमार तुरी खुद को पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में पेश करता था। उससे जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो परत-दर-परत इस गहरे षड्यंत्र का राज बाहर आने लगा।
मुंगेर में सीखी थी हथियार ढालने की बारीकी
जांच में यह बात सामने आई है कि अवैध हथियार बनाने की यह खतरनाक साजिश हाल-फिलहाल की नहीं है, बल्कि इसकी नींव साल 2020 में ही रख दी गई थी। आरोपी ने हथियार ढालने की यह बारीकी बिहार के मुंगेर स्थित अपने पैतृक गांव से सीखी थी। इसके बाद उसने गोड्डा के शहरी इलाके से चुपचाप यह काम शुरू किया। पकड़े जाने के डर से और मामले को दबाए रखने के लिए उसने बाद में इस ठिकाने को महागामा के खनन क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया, ताकि किसी को भनक तक न लगे।
इस नेटवर्क की गहराई केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने गोड्डा शहर और आसपास के कई अन्य लोगों के नामों का भी खुलासा किया है, जिन्होंने इस धंधे को फलने-फूलने में पूरी मदद की। लगभग आधा दर्जन ऐसे सहयोगियों के नाम पुलिस के रडार पर आ चुके हैं जो इस गिरोह के माध्यम से असलहों की सप्लाई और तस्करी का नेटवर्क चला रहे थे।
कई प्रभावशाली और दबंग चेहरे हो सकते हैं बेनकाब
इतना ही नहीं, इस पूरे घटनाक्रम के तार पथरगामा से लेकर ललमटिया क्षेत्र के कई प्रभावशाली और दबंग चेहरों से भी जुड़ते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन संदिग्धों का प्रभाव ईसीएल के क्षेत्रों में होने वाले अवैध कोयला खनन पर भी रहा है।
हालांकि, पुलिस प्रशासनिक स्तर पर अभी सतर्कता बरत रही है और साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है। भले ही अधिकारियों ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन अंदरखाने चल रही कार्रवाई से साफ है कि जल्द ही इस पूरे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर सभी दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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