
जमशेदपुर : खाना खाने के बाद पेट फूलना, डकार आना और भारीपन महसूस होना आम परेशानी है। इससे राहत पाने के लिए लोग अक्सर रसोई में मौजूद हींग और काला नमक का इस्तेमाल करते हैं। पारंपरिक खानपान में इन दोनों का उपयोग लंबे समय से होता आया है। हालांकि, हर बार भोजन के बाद इन्हें खाना जरूरी नहीं है और पेट की सभी समस्याओं का इलाज भी इन्हें नहीं माना जा सकता।
पाचन में मदद की संभावना, चमत्कारी इलाज नहीं
जमशेदपुर के सदर अस्पताल के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. मुकुल दीक्षित के अनुसार, हींग का पारंपरिक उपयोग गैस और पाचन संबंधी असहजता के लिए किया जाता है। भोजन में इसकी थोड़ी मात्रा स्वाद और सुगंध बढ़ाती है। लेकिन बार-बार पेट फूलने पर केवल घरेलू उपाय अपनाने के बजाय परेशानी की वजह समझना जरूरी है।
हींग के विशेष तैयार उत्पादों पर हुए छोटे अध्ययनों में पेट फूलने और भोजन के बाद भरेपन जैसे लक्षणों में सुधार मिला है। हालांकि, इन परिणामों से यह साबित नहीं होता कि रसोई की एक चुटकी हींग और काला नमक का मिश्रण सभी लोगों को समान लाभ देगा। इसके लिए अधिक मजबूत प्रमाण जरूरी हैं।
काला नमक भी सीमित मात्रा में लें
काला नमक स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसे सामान्य नमक से पूरी तरह अलग या नुकसानरहित समझना ठीक नहीं है। इसमें भी सोडियम होता है। इसलिए भोजन में पहले से पर्याप्त नमक हो तो ऊपर से काला नमक मिलाने की आदत कुल नमक की मात्रा बढ़ा सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वयस्कों को दिनभर के सभी खाद्य पदार्थों को मिलाकर पांच ग्राम से कम नमक लेना चाहिए। उच्च रक्तचाप, हृदय या गुर्दे की बीमारी वाले लोगों को चिकित्सक की निर्धारित सीमा का पालन करना चाहिए।
सही खानपान की आदतें भी जरूरी
डॉ. मुकुल दीक्षित के अनुसार, पेट की सेहत के लिए भोजन की मात्रा और खाने का तरीका भी मायने रखता है। धीरे-धीरे खाना, अच्छी तरह चबाना और जरूरत से ज्यादा भोजन करने से बचना उपयोगी आदतें हैं। जिन चीजों को खाने के बाद परेशानी बढ़ती है, उनकी पहचान करना भी जरूरी है।
अमेरिकी स्वास्थ्य संस्थान एनआईडीडीके के मुताबिक, कुछ लोगों में ज्यादा वसा वाला भोजन पेट फूलने की परेशानी बढ़ा सकता है। खानपान में बदलाव व्यक्ति के लक्षणों के अनुसार करना चाहिए।
लगातार परेशानी हो तो कराएं जांच
हींग और काला नमक से एसिडिटी खत्म होने, कब्ज निश्चित रूप से ठीक होने या शरीर के विषैले पदार्थ निकलने जैसे दावों को स्थापित तथ्य न मानें। गर्भावस्था में भी इन्हें उपचार के तौर पर नियमित लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
पेट की परेशानी के साथ लगातार दर्द, उल्टी, मल में खून या बिना कारण वजन कम होना जैसे लक्षण हों तो जांच कराएं। घरेलू नुस्खा आजमाते रहने से जरूरी उपचार में देरी हो सकती है।
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