
रांची: झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है। रिम्स के इतिहास में यह अपने आप में पहला ऐसा मौका है जब किसी निदेशक को उनके रिटायरमेंट के बाद भी सेवा विस्तार देकर संस्थान की कमान सौंपी गई है। राज्य सरकार ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए डॉ. डीके सिन्हा को अगले छह महीने तक के लिए प्रभारी निदेशक बनाए रखने का बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में विधिवत अधिसूचना भी जारी कर दी है।
क्या था पूरा घटनाक्रम और क्यों बना था सस्पेंस
दरअसल, डॉ. डीके सिन्हा निर्धारित समय के अनुसार पिछले 31 अक्टूबर को ही अपनी सेवा पूरी कर रिटायर हो चुके थे। उनके रिटायरमेंट की तारीख नजदीक आते ही रिम्स के प्रशासनिक भविष्य को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई थी। इससे पहले रिम्स शासी परिषद की 66वीं बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया था कि संस्थान की शैक्षणिक, वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाएं बिना किसी बाधा के चलती रहें, इसलिए डॉ. सिन्हा का कार्यकाल बढ़ाया जाना बेहद जरूरी है।
इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा गया था, लेकिन वहां से बात नहीं बन पाई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 29 अक्टूबर को इस फाइल को कार्मिक और वित्त विभाग के पास भेजा, मगर 31 अक्टूबर की शाम तक कोई अंतिम फैसला न आने के कारण वे स्वतः सेवानिवृत्त हो गए। इस प्रशासनिक पेंच के चलते रिम्स में दो दिनों तक भारी असमंजस की स्थिति बनी रही कि आखिर अब संस्थान की बागडोर कौन संभालेगा।
सरकार का नया दांव और नई व्यवस्था
कैबिनेट से मुहर न लग पाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एक वैकल्पिक रास्ता निकाला। मुख्यमंत्री के विशेष आदेश और आगामी कैबिनेट की स्वीकृति की प्रत्याशा में स्वास्थ्य विभाग ने 2 नवंबर को नोटिफिकेशन जारी कर दिया। इसके तहत डॉ. डीके सिन्हा को 1 नवंबर 2026 से लेकर 30 अप्रैल 2027 तक अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, रिम्स के प्रभारी निदेशक पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
रिम्स के पूरे इतिहास में रिटायरमेंट के बाद इस तरह का कार्यकारी प्रभार पहली बार दिया गया है। सरकार ने इसे फिलहाल एक अस्थायी व्यवस्था करार दिया है, जिससे संस्थान के रोजमर्रा के कामकाज और विकास कार्यों पर कोई विपरीत असर न पड़े। इस फैसले के बाद एक बार फिर साफ हो गया है कि सरकार फिलहाल अस्पताल के शीर्ष नेतृत्व में किसी भी तरह का शून्य या व्यवधान नहीं चाहती है।

