
नई दिल्ली/ रांची : हजारीबाग भूमि घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की प्राथमिकी संख्या 11/2025 से जुड़े मामले में उन्हें सशर्त जमानत देने का आदेश दिया है। विनय चौबे नवंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में थे। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुका था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त जमानत का दिया आदेश
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद विनय चौबे को सशर्त जमानत देने का आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद अदालत ने कहा कि निचली अदालत जमानत की शर्तें तय करेगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो राज्य सरकार जमानत निरस्त कराने के लिए संबंधित अदालत का रुख कर सकती है।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर पहुंचे थे शीर्ष अदालत
विनय चौबे ने झारखंड हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि विनय चौबे नवंबर 2025 से जेल में हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इसी मामले के अन्य आरोपी विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने एक तथ्यात्मक प्रश्न पूछा, जिसका संतोषजनक उत्तर बचाव पक्ष की ओर से नहीं दिया जा सका। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि अधिवक्ता को मामले के तथ्यों की पूरी जानकारी होनी चाहिए।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि विनय चौबे प्रभावशाली अधिकारी हैं और उनके विरुद्ध अन्य मामले भी लंबित हैं। सरकार ने आशंका जताई कि जमानत मिलने पर वे मामले के आरोपियों या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देने का निर्णय लिया।
हजारीबाग भूमि घोटाला क्या है?
यह मामला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज प्राथमिकी संख्या 11/2025 से जुड़ा है। इस मामले में आरोप है कि वर्ष 2020-21 के दौरान दबाव बनाकर वन भूमि का नामांतरण नेक्सजेन कंपनी के मालिक विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम कराया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले की प्रारंभिक जांच अगस्त 2015 में शुरू की गई थी। लगभग 10 वर्ष बाद इस मामले में नियमित प्राथमिकी दर्ज की गई।
कंपनी में नकद जमा कराने का भी आरोप
जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि वर्ष 2010 से 2015 के बीच ब्रह्मास्त्र एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी में 3.16 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए। इस कंपनी में विनय सिंह की पत्नी स्निग्धा सिंह निदेशक बताई गई हैं।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इस मामले में वित्तीय लेनदेन, वन भूमि के नामांतरण और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जांच कर रहा है। मामले की सुनवाई अभी जारी है और अंतिम निर्णय न्यायालय के विचाराधीन है।

