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जामता़ड़ा में जिला परिषद फंड से बनने वाले विवाह मंडप भवन पर खड़ा हुआ विवाद

एक ही निर्माण कार्य का दो बार शिलान्यास; मंत्री और अध्यक्ष के बीच समन्वय की कमी उजागर

by Anand Kumar
JAMTARA
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Jamtara : जिले में जिला परिषद फंड से करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाले आधुनिक विवाह मंडप भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में हुई जल्दबाजी और आपसी तालमेल की कमी ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। एक ही निर्माण कार्य का दो बार शिलान्यास होने से स्थानीय सियासत में गहमागहमी मच गई है। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और जिला परिषद अध्यक्ष राधा रानी सोरेन के बीच प्रोटोकॉल को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

मंत्री ने किया शिलान्यास, अध्यक्ष रहीं अनुपस्थित

जानकारी के अनुसार, पुराने जिला परिषद कार्यालय परिसर में प्रस्तावित विवाह मंडप भवन के शिलान्यास कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और जिला परिषद अध्यक्ष राधा रानी सोरेन दोनों को शामिल होना था। लेकिन अध्यक्ष के देर से पहुंचने के कारण मंत्री अंसारी ने उनकी अनुपस्थिति में ही शिलान्यास कर दिया और कार्यक्रम स्थल से चले गए। शिलान्यास के दौरान स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने परियोजना को जामताड़ा शहर के लोगों के लिए बड़ा तोहफा बताया। उन्होंने कहा कि विवाह मंडप में सभी आधुनिक सुविधाएं होंगी और गरीबों को मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, मंत्री ने शहर में एक चिल्ड्रन पार्क के निर्माण की भी घोषणा की।

अध्यक्ष ने दोबारा शिलान्यास किया, जतायी नाराजगी

मंत्री के जाने के बाद जब जिला परिषद अध्यक्ष राधा रानी सोरेन कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं, तो उन्होंने उसी निर्माण कार्य का दोबारा शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के प्रति अपनी नाराजगी खुलेआम व्यक्त की। अध्यक्ष ने कहा कि यह भवन जिला परिषद के फंड से बन रहा है, फिर भी मंत्री ने बिना उन्हें साथ लिए शिलान्यास कर दिया, जिससे दोबारा शिलान्यास की नौबत आई।

3 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक विवाह मंडप

जिला परिषद द्वारा करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा यह आधुनिक विवाह मंडप भवन शहरवासियों के लिए सामाजिक और सामुदायिक कार्यक्रमों की बड़ी सुविधा साबित होगा। गरीब वर्ग के लोगों को यहां सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध कराने की योजना है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण परियोजना के शिलान्यास में दोनों जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी साफ दिखी। एक ही भवन का दो बार शिलान्यास होना स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष इसे प्रोटोकॉल की विफलता और समन्वय की कमी बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष के भीतर भी इस घटना से असहजता झलक रही है। इस घटनाक्रम के बाद जिला परिषद और राज्य सरकार के मंत्रियों के बीच तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में विकास कार्यों पर इसका असर पड़ सकता है।

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