
306 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर और 200 मेडिकल ऑफिसर की होगी नियुक्ति
अस्पतालों में आधुनिक जांच सुविधाएं बढ़ाने की योजना तेजी से हो रहा काम
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने विभाग के अधिकारियों के साथ की मीटिंग
रांची : झारखंड में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए राज्य सरकार 506 चिकित्सकों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज करेगी। इनमें 306 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर और 200 मेडिकल ऑफिसर शामिल हैं। इसके अलावा दक्षिण भारत से 1200 डॉक्टरों को झारखंड लाने की पहल की जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने दो विशेष टीमें गठित की हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने शुक्रवार को विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक में डॉक्टरों की उपलब्धता, अस्पतालों के संचालन और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की समीक्षा की। सरकार का जोर डॉक्टरों की नियुक्ति के साथ सरकारी अस्पतालों में जांच और उपचार की सुविधाएं बढ़ाने पर भी है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। ग्रामीण, पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों या राज्यों का रुख नहीं करना पड़े। नेपाल हाउस स्थित स्वास्थ्य विभाग में हुई बैठक में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु से डॉक्टर लाने की पहल
दक्षिण भारत से चिकित्सकों को झारखंड लाने के लिए गठित दोनों टीमों को डॉक्टरों की उपलब्धता और नियुक्ति की संभावनाओं पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। पहली टीम का नेतृत्व विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा करेंगी। इसमें संयुक्त सचिव ललित शुक्ला शामिल होंगे। दूसरी टीम का नेतृत्व राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा करेंगे। इन टीमों के माध्यम से चिकित्सकों को झारखंड में काम करने के लिए उपलब्ध करायी जाने वाली सुविधाओं और कार्य वातावरण पर भी विचार किया जाएगा।
डिजिटल एक्स-रे की सुविधा बढ़ाने पर जोर
सरकारी अस्पतालों में सीटी स्कैन, एमआरआई, डिजिटल एक्स-रे और पैथोलॉजी जांच की सुविधाओं को मजबूत करने की योजना है। स्वास्थ्य विभाग का जोर इन उपकरणों की उपलब्धता के साथ उनके नियमित संचालन पर भी रहेगा। इसके लिए प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों, मशीनों के रखरखाव और समय पर जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जायेगा। इससे मरीजों को जरूरी जांच के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
अधूरे उपयोग वाले अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों पर ध्यान
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों के भवन बना देना पर्याप्त नहीं है। वहां डॉक्टर, नर्स और तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध होने चाहिए तथा चिकित्सा उपकरणों का उपयोग भी नियमित रूप से होना चाहिए। जिन स्वास्थ्य संस्थानों में संसाधनों और कर्मचारियों की कमी के कारण पूरी क्षमता से काम नहीं हो पा रहा है, उन्हें प्रभावी ढंग से संचालित करने पर जोर दिया जायेगा। मेडिकल कॉलेजों में रिक्त फैकल्टी पदों और बैकलॉग रिक्तियों को भरने की दिशा में भी काम किया जायेगा, ताकि चिकित्सा शिक्षा और मरीजों के इलाज की गुणवत्ता में सुधार हो।
108 एंबुलेंस कर्मियों से हड़ताल नहीं करने की अपील
108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारियों की संभावित हड़ताल के मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि सरकार उनकी समस्याएं सुनने और बातचीत से समाधान निकालने के लिए तैयार है। उन्होंने कर्मचारियों से हड़ताल से बचने की अपील की, ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को परेशानी नहीं हो। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा तथा सम्मानजनक कार्य वातावरण को भी जरूरी बताया।
15 को होगी रिम्स गवर्निंग बॉडी की बैठक
रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की गवर्निंग बॉडी की बैठक 15 अक्टूबर को प्रस्तावित है। इसमें संस्थान के कामकाज, चिकित्सा सुविधाओं और व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। मंत्री ने कहा कि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी। सरकार का लक्ष्य डॉक्टरों की उपलब्धता, आधुनिक जांच सुविधाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं का विस्तार कर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है

