
रांची: झारखंड में सरकारी नौकरियों की भर्तियों से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। झारखंड लोक सेवा आयोग घोटाले में पकड़े गए परीक्षा कराने वाली कंपनी TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और डायरेक्टर रामवीर सिंह ने CID की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की भर्ती में 9 लाख की रिश्वत
अभय तिवारी ने कुबूल किया है कि उसे स्वास्थ्य विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर हुई भर्तियों के एवज में 9 लाख रुपये का कमीशन मिला था। इसके अलावा, अपनी एजेंसी टीडीपीएल को जेएसएससी में काम दिलाने के बदले भी उसने 5 लाख रुपये ऐंठे थे।
पूछताछ में पता चला कि अभय तिवारी की प्रशासनिक अधिकारियों और जेएसएससी के असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर प्रेम कुमार से अच्छी सांठगांठ थी। इसी पहुंच का फायदा उठाकर उसने टीडीपीएल नाम की एजेंसी को जेएसएससी में काम दिलवाया।
इस सौदे में अभय और अफसर प्रेम कुमार-दोनों को 5-5 लाख रुपये का कमीशन मिला था। अभय ने खुद माना कि उसने जेएसएससी दफ्तर के बाहर अफसर को रिश्वत के पैसे पहुंचाए थे।
रेट कम मिला तो बदला ठेका
टीडीपीएल एजेंसी का कहना है कि काम के बदले उन्हें बहुत कम पैसे मिल रहे थे, जिससे उन्हें घाटा हो रहा था। इसलिए वे पीछे हट गए और जेएसएससी ने उन्हें हटाकर ‘वेबेल’ नाम की नई एजेंसी को परीक्षा संचालन का काम दे दिया।
गौर करने वाली बात यह है कि इसी ‘वेबेल’ एजेंसी पर हाल ही में बोकारो में छात्रों को जेएसएससी परीक्षा के सवाल-जवाब रटाने का गंभीर आरोप लगा है।
क्या काम करती हैं ये एजेंसियां
सरकारी परीक्षाओं में इन एजेंसियों का काम बेहद अहम होता है। अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक जांच, फोटो मिलाना, परीक्षा केंद्रों पर CCTV लगाना, प्रश्न-पत्रों को सुरक्षित केंद्रों तक पहुंचाना और OMR शीट जमा करना-यह सारी जिम्मेदारी इन्हीं एजेंसियों के पास होती है। लेकिन इसी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर धांधली का खेल चल रहा था।


