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Jharkhand News : बीपी केशरी ने झारखंड आंदोलन को दी बौद्धिक दिशा : डॉ. उमेश नन्द तिवारी

by Nikhil Kumar
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द फोटोन न्यूज परिवार की ओर से स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

रांची:  झारखंड आंदोलन के प्रखर बुद्धिजीवी, नागपुरी कवि, लेखक, विचारक एवं आंदोलनकारी डॉ. बीपी केशरी की दसवीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को मोरहाबादी स्थित जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय के नागपुरी विभाग में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। विभाग के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने डॉ. केशरी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश नन्द तिवारी ने कहा कि डॉ. बीपी केशरी केवल नागपुरी भाषा-साहित्य के विद्वान नहीं थे, बल्कि झारखंड की अस्मिता और पहचान के सजग प्रहरी थे। झारखंड आंदोलन को वैचारिक आधार देने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनका साहित्य और चिंतन आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा, संस्कृति और पहचान के प्रति जागरूक करता रहेगा।

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डॉ. बीरेन्द्र कुमार महतो ने कहा कि डॉ. केशरी ने झारखंड आंदोलन को केवल राजनीतिक आंदोलन के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे भाषा, संस्कृति, इतिहास और अस्मिता से जोड़कर व्यापक वैचारिक आंदोलन का स्वरूप दिया। स्वर्गीय डॉ. रामदयाल मुंडा के साथ मिलकर उन्होंने झारखंड आंदोलन को बौद्धिक दिशा प्रदान की। नागपुरी भाषा-साहित्य के विकास में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
डॉ. रीझु नायक ने कहा कि डॉ. बीपी केशरी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। लेखन और वैचारिक हस्तक्षेप के माध्यम से उन्होंने झारखंड की सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना को मजबूत किया। युवा पीढ़ी को उनके साहित्य और विचारों का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए।

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डॉ. मनोज कच्छप ने कहा कि डॉ. केशरी का जीवन संघर्ष, सृजन और सामाजिक प्रतिबद्धता का उदाहरण है। झारखंडी भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण एवं विकास के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी रचनाएं झारखंड की सामूहिक स्मृति और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. बीपी केशरी की दसवीं पुण्यतिथि उन्हें याद करने के साथ-साथ उनके विचारों को आत्मसात करने और झारखंडी भाषाओं एवं साहित्य के संरक्षण-संवर्धन का संकल्प लेने का अवसर भी है।
कार्यक्रम में सेमेस्टर वन और सेमेस्टर फोर्थ के नीलम कुमारी, शोभा कुमारी, चन्दा देवी, प्रभा सुरिन, ऋषि, काजल कुमारी, सोहावती कुमारी, वीणा कुमारी, सीता बोदरा, रानी कुंकल, गीता पूर्ति, महावीर उरांव, राकेश रोशन उरांव समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे। कार्यक्रम का समापन डॉ. बीपी केशरी के विचारों और योगदान को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।

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