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सुप्रीम कोर्ट पहुंचे मधु कोड़ा की याचिका पर सुनवाई टली, चुनाव लड़ने की मांगी थी अनुमति

अधिवक्ता ने अपने तर्क में कहा कि कोड़ा को चुनाव लड़ने का अधिकार न देने से न केवल उनका सार्वजनिक जीवन में बने रहने का अधिकार प्रभावित हुआ है, बल्कि मतदाताओं का उन्हें चुनने का अधिकार भी प्रभावित हुआ है।

by Reeta Rai Sagar
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रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता मधु कोड़ा ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद चुनाव लड़ने के सपनों पर पानी फिरता देख उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसके बाद मधु कोड़ा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सुनवाई 25 अक्तूबर तक टाल दी है।

क्या कहा था दिल्ली हाई कोर्ट की एकल पीठ ने


दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने मधु कोड़ा की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि याचिकाकर्ता केवल इस आधार पर फैसले पर रोक लगाना चाहते हैँ कि वह चुनाव लड़ सकें, जो उचित नहीं है। प्रथम दृष्टया यही लगता है कि वह इस मामले में दोषी हैं, इसलिए निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने का कोई ठोस कारण नहीं है।

कोयला घोटाला मामले में हुई है तीन साल की सजा


बता दें कि निचली अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव, राज्य के पूर्व मुख्य सचिव ए.के. बसु और मधु कोड़ा के सहयोगियों को कोयला घोटाले में दोषी ठहराया था। सभी को कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई थी और सजा के साथ आरोपी पर जुर्माना भी लगाया गया था। कोड़ा पर कोलकाता स्थित एक कंपनी विनी आयरन एंड स्टील को कोयला ब्लॉक आवंटन से सेंबंधित मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2017 के तहत दोषी ठहराया गया था।

अगस्त में बीजेपी में शामिल हुए थे कोड़ा


2006-2008 के अपने कार्यकाल के दौरान मधु कोड़ा को दिल्ली की विशेष अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी। कोड़ा इसी साल अगस्त में बीजेपी में शामिल हुए थे। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(1) के तहत दोष सिद्ध होने के बाद कोई भी व्यक्ति को सजा भुगतने के 6 साल बाद तक संसद या विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित करता है।

मधु कोड़ा के वकील ने यह दिया तर्क


दिल्ली उच्च न्यायालय में कोड़ा के वकील ने तर्क दिया कि सजा के खिलाफ उनकी अपील अब भी लंबित है। इसके अलावा वकील ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को मानहानि मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद सजा पर रोक लगाए जाने के फैसले का भी हवाला दिया। अधिवक्ता ने अपने तर्क में कहा कि कोड़ा को चुनाव लड़ने का अधिकार न देने से न केवल उनका सार्वजनिक जीवन में बने रहने का अधिकार प्रभावित हुआ है, बल्कि मतदाताओं का उन्हें चुनने का अधिकार भी प्रभावित हुआ है। 3500 करोड़ के कोयला घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय भी 2009 से कोड़ा की जांच कर रहा है।

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