
Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम के पोखारी स्थित नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में शुक्रवार को चौथे दीक्षांत समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विभिन्न संकायों के स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के साथ हुई। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने मुख्य अतिथि सहित सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान, कौशल विकास और भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि संस्थान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
दीक्षांत समारोह के दौरान विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। शैक्षणिक उत्कृष्टता के आधार पर चयनित छात्रों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदकों से सम्मानित किया गया। जैसे ही मेधावी विद्यार्थियों के नामों की घोषणा हुई, पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। इस गौरवपूर्ण अवसर का साक्षी बने अभिभावकों के चेहरों पर भी खुशी साफ दिखाई दी।
अपने संबोधन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन की नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा और कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनकर देश की सेवा करना भी है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्शों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि उनका जीवन साहस, अनुशासन, देशभक्ति और समर्पण का प्रतीक है। यदि युवा उनके विचारों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ेंगे तो वे स्वयं भी सफल होंगे और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू नई शिक्षा नीति (एनईपी) की सराहना करते हुए कहा कि यह नीति विद्यार्थियों को कौशल आधारित, रोजगारोन्मुख और नवाचार केंद्रित शिक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बदलते समय के अनुरूप आधुनिक तकनीक और व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, अनुसंधान और नवाचार का है। विद्यार्थियों को इन क्षेत्रों में स्वयं को दक्ष बनाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से नौकरी खोजने के बजाय रोजगार सृजित करने की सोच विकसित करने का आह्वान किया, ताकि देश की आर्थिक प्रगति को नई गति मिल सके।
उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक शोध सुविधाओं, नैतिक मूल्यों और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण को प्राथमिकता देने की अपील की। साथ ही विश्वविद्यालय परिसर को नशामुक्त बनाने और विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी एवं सकारात्मक सोच विकसित करने पर भी जोर दिया।
शिक्षकों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक केवल शिक्षा देने वाले नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करने वाले मार्गदर्शक हैं। इसलिए विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान देना समय की आवश्यकता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. पाणी ने कहा कि संस्थान शिक्षा के साथ-साथ अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने पर लगातार काम कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवनभर सीखने की भावना बनाए रखने का आह्वान किया।
समारोह में रजिस्ट्रार नागेंद्र सिंह, विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अभिभावक तथा शहर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। राष्ट्रगान के साथ समारोह का विधिवत समापन हुआ।

