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One nation-one election पर ओवैसी हुए नाराज, बोले क्यों है इसकी जरुरत

by Reeta Rai Sagar
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सबहेड- Owaisi on One Nation One Election: मोदी सरकार पर क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करने का आरोप लगाते हुए ओवैसी ने कहा कि सरकार अपनी सुविधा के अनुसार काम नहीं कर सकती। संवैधानिक तरीके से ही काम करना पड़ेगा। ओवैसी ने कहा कि बीजेपी और संघ हमेशा से ऐसा करता आया है। हम इस प्रस्ताव के विरोध में है।

सेंट्रल डेस्क। Owaisi on One Nation One Election: वन नेशन-वन इलेक्शन के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। सरकार संभवतः इसे संसद के शीतकालीन सत्र यानि नवंबर-दिसंबर में पेश कर सकती है। केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी के बाद अब विपक्ष ने इस पर अपना पक्ष रखा है। सरकार के इरादों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस प्रस्ताव को इस तरह से मंजूरी देकर ध्यान भटकाने का काम किया गया है।

एक राष्ट्र एक चुनाव का प्रस्ताव प्रैक्टिकल नहीं
यह संविधान के खिलाफ है। कई औऱ नेता भी इसकी आलोचना कर रहे है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कहना है कि ‘एक राष्ट्र एक चुनाव का प्रस्ताव प्रैक्टिकल नहीं है। लोकतंत्र में इस तरह के प्रस्ताव नहीं चल सकते है। बीजेपी पर लोकतंत्र को न मानने का आरोप लगाते हुए खरगे ने कहा कि लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए जब-जब जरुरत होगी, चुनाव कराना पड़ेगा।’

One Nation One Election का हम विरोध करते हैं- असदुद्दीन ओवैसी

AIMIM प्रमुख अससुद्दीन ओवैसी ने भी इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा। ओवैसी का कहना है कि आखिर ऐसा करने की क्या जरुरत है। मोदी सरकार पर क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करने का आरोप लगाते हुए ओवैसी ने कहा कि सरकार अपनी सुविधा के अनुसार काम नहीं कर सकती। संवैधानिक तरीके से ही काम करना पड़ेगा। ओवैसी ने कहा कि बीजेपी और संघ हमेशा से ऐसा करता आया है। हम इस प्रस्ताव के विरोध में है।

मोदी सरकार मौलिक चीजों से ध्यान हटाने में माहिर- मनोज झा
इसके अलावा RJD सांसद मनोज झा और TMC सांसद कल्याण बनर्जी समेत कई नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। राजद नेता ने कहा कि भारत में पहले भी एक राष्ट्र-एक चुनाव की प्रक्रिया थी, जिसे 1962 के बाद हटाया गया। उन्होने कहा कि ‘यदि राज्यों में चुनाव के बाद सरकारें गिर जाती है, तो ऐसे में क्या किया जाएगा। क्या उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाएगा। मनोज झा ने मोदी सरकार पर इल्जाम लगाया कि ये लोग मौलिक चीजों से ध्यान हटाने में माहिर है।’

TMC नेता ने प्रस्ताव को बताया असंवैधानिक
टीएमसी नेता ने इस प्रस्ताव को असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि ‘यदि किसी कारण से मोदी सरकार गिर जाती है, तो क्या उसके साथ देश के सभी राज्यों में भी चुनाव करने होंगे।’ आप सांसद संदीप पाठक का कहना है कि ‘जब एक साथ 4 राज्यों के चुनाव नहीं करा पाएं, तो वन नेशन-वन इलेक्शन कैसे कराएंगे।’

बता दें कि रिपोर्ट में लोकसभा, विधानसभा औऱ स्थानीय स्तर पर एक ही वोटर लिस्ट रखने की भी बात है। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होंगे। दूसरे चरण में 100 दिनों के भीतर ही स्थानीय निकाय के चुनाव कराने की बात कही गई। कमेटी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस प्रस्ताव पर 47 राजनीतिक दलों ने अपनी राय दी। जिसमें से 32 पक्ष में और 15 विपक्ष में थे।

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