RANCHI: राज्य के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल रिम्स की बदहाल व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। हाई कोर्ट की फटकार और सुधार के निर्देशों के बावजूद रिम्स प्रशासन की लापरवाही कम होती नहीं दिख रही है। मरीजों की दुर्दशा और हॉस्पिटल की अव्यवस्था से एकबार फिर सवाल उठ रहे है कि आखिर रिम्स की व्यवस्था कब सुधरेगी। चूंकि अब भी रिम्स में मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। न्यूरो वार्ड में तो पर्याप्त बेड ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वहां पर जमीन और गैलरी में मरीजों को इलाज जारी है। जबकि प्रबंधन ने पिछली जीबी की बैठकों में ये आश्वस्त किया था कि अब न्यूरो में मरीजों का जमीन पर इलाज नहीं किया जएगा। उन्हें दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इसके बावजूद प्रबंधन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
दवा खरीदकर ला रहे परिजन
प्रबंधन ने बताया था कि मरीजों को ज्यादातर दवाएं हॉस्पिटल से उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन मरीजों के परिजनों को बाहर से दवाएं और जरूरी मेडिकल इक्विपमेंट्स खरीदकर लानी पड़ रही है। इमरजेंसी में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। जहां पर गंभीर मरीजों के परिजन दवाएं खरीदकर ला रहे है। इससे उनकी जेब पर भी असर पड़ रहा है।

अब भी खराब पड़े है मॉनिटर
सबसे चिंताजनक स्थिति रिम्स के ट्रामा सेंटर सह सेंट्रल इमरजेंसी की है। जहां कई मॉनिटर अब भी बंद पड़े हैं। इनकी मरम्मत या बदलने की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। जिससे कि गंभीर मरीजों की प्रापर तरीके से निगरानी नहीं हो पा रही है।
बेहतर व्यवस्था करने का था निर्देश
झारखंड हाई कोर्ट ने रिम्स की खस्ता हालत को लेकर पहले भी कड़ी नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने पिछले लगातार सुनवाई की। इसके बाद रिम्स प्रशासन को सुधारात्मक कदम उठाने और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। लेकिन हाई कोर्ट की फटकार के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। मरीजों को प्रापर सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है।
ऑब्जर्वर की निगरानी में फिर जीबी की बैठक
हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर की निगरानी में रिम्स गवर्निंग बॉडी की दो बैठकें हो चुकी है। इसके बाद 12 नवंबर को भी रिम्स की गवर्निंग बॉडी की बैठक आब्जर्वर की निगरानी में होने वाली है। इस बैठक में हॉस्पिटल की मौजूदा स्थिति, उपकरणों की खराबी, मरीजों की परेशानी और दवा की आपूर्ति जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। बता दें कि हाई कोर्ट ने रिम्स को लेकर दायर पीआईएल की सुनवाई करते हुए जीबी की बैठक आब्जर्वर की निगरानी में कराने का आदेश दिया था।
मोक्ष वाहन हो गए ब्रेक डाउन
हॉस्पिटल में आधा दर्जन मोक्ष वाहन है। जिसमें से 5 मोक्ष वाहन ब्रेक डाउन है। ऐसे में अगर किसी मरीज की इलाज के दौरान रिम्स में मौत हो जा रही है तो उसे मोक्ष वाहन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में हालात ये है कि प्राइवेट एंबुलेंस वाले इसका फायदा उठा रहे है। परिजनों से शव ले जाने के नाम पर मुंहमांगा पैसा वसूल रहे है। चूंकि परिजनों के पास इसके अलावा कोई आप्शन ही नहीं है।

