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LALU YADAV IFTAR PARTY : बिहार में इफ्तार पॉलिटिक्स : आज लालू यादव देंगे इफ्तार पार्टी, CM नीतीश का बहिष्कार करने वाले मुस्लिम नेता भी होंगे शरीक

by Rakesh Pandey
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पटना : बिहार में इस बार रमजान के महीने में इफ्तार पार्टी को लेकर राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद अब आरजेडी प्रमुख लालू यादव भी अपनी इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रहे हैं। इस पार्टी के दौरान एक सियासी संदेश देने की कोशिश की जा रही है, खासकर मुस्लिम समुदाय को लेकर। हालांकि, इस बार यह पार्टी लालू के पारंपरिक सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड की बजाय उनके वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी के आवास पर होगी। कहा जा रहा है कि जिन मुस्लिम नेताओं ने नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का बहिष्कार किया था, वे इस पार्टी में शरीक होंगे।

सिद्दीकी के आवास पर होगा आयोजन

लालू यादव के लिए इफ्तार पार्टी का आयोजन कोई नई बात नहीं है। वह हर साल अपने सरकारी आवास पर इस आयोजन को करते थे, लेकिन इस बार उन्होंने इसे बदलते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के आवास 12 स्टैंड रोड पर आयोजित किया है। लालू ने खुद एक पत्र लिखकर सभी नेताओं और मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस इफ्तार पार्टी में आमंत्रित किया है। यह आयोजन बिहार के सियासी माहौल को देखते हुए खास महत्व रखता है, क्योंकि यह एक चुनावी साल में हो रहा है।

महागठबंधन के नेताओं को न्योता

आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने बताया कि लालू यादव की इस इफ्तार पार्टी में महागठबंधन के सभी घटक दलों के नेताओं को आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा, बुद्धिजीवियों, समाज के विभिन्न वर्गों और रोजेदारों को भी इस आयोजन में शामिल होने के लिए बुलाया गया है। इस आयोजन का उद्देश्य न केवल धार्मिक एकता को बढ़ावा देना है, बल्कि एक सियासी संदेश भी देना है, खासकर उन मुस्लिम वोटरों के बीच जिनकी संख्या बिहार में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इफ्तार के बहाने सियासी संदेश

बिहार में इफ्तार पार्टी का आयोजन सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक सियासी अवसर भी है। वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय का कहना है कि लालू यादव ने 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद से हर साल इफ्तार पार्टी का आयोजन किया है। इस दौरान वह मुस्लिम समुदाय को यह संदेश देने का प्रयास करते हैं कि वह उनके सच्चे हमदर्द हैं। उनकी पार्टी का कोर वोट बैंक मुस्लिम और यादव समुदाय पर आधारित है और इफ्तार पार्टी एक तरीका है, जिससे वह इन वोटरों के बीच अपनी सियासी स्थिति मजबूत करते हैं।

सुनील पांडेय ने आगे कहा, ‘लालू प्रसाद समय का सही इस्तेमाल करते हैं। बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक है और वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर मुस्लिम समुदाय में नाराजगी है। ऐसे में यह इफ्तार पार्टी आरजेडी के लिए एक अवसर बन सकती है, जिससे वह मुस्लिम वोटरों का समर्थन हासिल कर सके’।

नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी का विरोध

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी रविवार को अपने सरकारी आवास पर इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था, लेकिन वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने इसका विरोध किया था। कई मुस्लिम संगठनों ने मुख्यमंत्री से अपील की थी कि वे इस इफ्तार पार्टी में शामिल न हों, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग इस पार्टी में शामिल हुए थे।

लालू के पक्ष में मुस्लिम समाज का समर्थन

सुनील पांडेय का कहना है कि लालू प्रसाद यादव राजनीति के मास्टर प्लेयर हैं। वह जानते हैं कि चुनावी साल में किस प्रकार के कदम उठाने चाहिए। यही वजह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी के बाद, जहां मुस्लिम समुदाय ने नाराजगी जताई थी, आरजेडी ने उसी दिन इफ्तार पार्टी का आयोजन किया। इस पार्टी में सभी इस्लामिक संगठनों को आमंत्रित कर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि मुस्लिमों का सबसे सच्चा हमदर्द बिहार में सिर्फ आरजेडी और लालू यादव ही हैं।

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