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Chaibasa News : 110 साल से सड़क का इंतजार कर रहा सारंडा का बालिबा गांव, 2004 में नक्सल मुठभेड़ से चर्चा में आया था गांव

आजादी के 78 साल बाद भी 7 किमी कच्चे रास्ते पर टिका जीवन। बरसात में कीचड़ और दलदल में बदल जाता है यह गांव।

by Rajeshwar Pandey
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चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सारंडा जंगल में बसा ऐतिहासिक वन ग्राम बालिबा आज भी बुनियादी सुविधा सड़क के लिए तरस रहा है। अंग्रेजों द्वारा 1917 में बसाए गए इस गांव को बसे हुए 110 साल हो गए, लेकिन आजादी के 78 वर्ष बाद भी यहां तक पक्की सड़क नहीं पहुंची है।

7 किमी कच्चा रास्ता ही सहारा

बालिबा चौक से गांव तक लगभग 7 किलोमीटर का रास्ता आज भी कच्चा है। यही रास्ता ग्रामीणों की एकमात्र जीवनरेखा है। बरसात में यह कीचड़ और दलदल में बदल जाता है। उस समय गांव का संपर्क बाजार, अस्पताल और सरकारी दफ्तरों से लगभग टूट जाता है। दोपहिया वाहन या पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों पर पड़ता है।

ब्रिटिश काल से जुड़ा इतिहास

जानकारी के अनुसार अंग्रेजों ने सारंडा के घने जंगलों से वन संपदा निकालने के लिए थोलकोबाद, करमपदा, भनगांव, कुमड़ी, तिरिलपोसी, बिटकिलसोय, बालिबा, दीघा और नवागांव जैसे वन गांव बसाए थे। यहां आदिवासी परिवारों को बसाकर साल की लकड़ी कटाई और ढुलाई का काम कराया जाता था। समय के साथ ज्यादातर गांवों तक पक्की सड़क पहुंच गई, पर बालिबा विकास की दौड़ में पीछे रह गया। छोटानागरा से कुदलीबाद होते हुए थोलकोबाद तक सड़क पक्की है, लेकिन बालिबा चौक से आगे का हिस्सा आज भी कच्चा है।

नक्सल मुठभेड़ से चर्चा में आया था गांव

बालिबा 2004 में तब सुर्खियों में आया था जब यहां पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में 29 जवान शहीद हुए थे। सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद अब इलाके में नक्सली गतिविधियां काफी कम हैं, लेकिन विकास अब भी गांव तक नहीं पहुंचा।

सड़क की मांग दोहराई

हाल में बरायबुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में गांव के मुंडा बिनोद होनहागा ने विधायक सोनाराम सिंकू से बालिबा तक पक्की सड़क बनाने की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना है कि वे लोकतंत्र में भरोसा रखते हैं, वोट देते हैं और सरकार चुनते हैं, इसके बावजूद उनका गांव उपेक्षित है। उनका सवाल है कि सारंडा की खदानों से सरकार को हर साल अरबों का राजस्व मिलता है और DMFT फंड में भी अच्छी खासी राशि है, फिर सिर्फ 7 किमी सड़क क्यों नहीं बन पाई?

ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अब तक न स्थानीय विधायक और न सांसद ने इस समस्या पर ध्यान दिया। सिर्फ वोट के समय राजनीति होती है। अब गांव वालों को उम्मीद है कि इस बार उनकी पुरानी मांग पूरी होगी। सड़क बनने से बालिबा को विकास, सम्मान और बेहतर भविष्य की नई राह मिलेगी।

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