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Jamshedpur News : टाटा मोटर्स के कवाई चालकों की मांगों को लेकर डीएलसी से हस्तक्षेप की मांग

बोनस, न्यूनतम मजदूरी, एरियर और 24 घंटे की ड्यूटी का मुद्दा उठा; चालकों ने भुगतान व श्रम नियमों के अनुपालन की मांग की

by Arvind Shrivastava
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Jamshedpur : टाटा मोटर्स के कनवाई चालकों से जुड़ी विभिन्न मांगों और लंबित भुगतान को लेकर डीएलसी, जमशेदपुर को लिखित आवेदन देकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है। टाटा मोटर्स, जमशेदपुर के चालक ज्ञान सागर प्रसाद की ओर से 15 सितंबर 2026 को दिए गए आवेदन में बोनस, न्यूनतम मजदूरी, एरियर, पीएफ, इंश्योरेंस और बैंक भुगतान समेत कई मुद्दे उठाए गए हैं।

आवेदन में कहा गया है कि 1 मार्च 2024 से चालकों द्वारा किए जा रहे धरने के कारण टाटा मोटर्स एवं टीटीसीए द्वारा मजदूरी की दर में बदलाव किया गया। आरोप है कि 1 से 3 दिन तक पहुंचने वाली गाड़ियों के चालकों का वेतन 735 रुपये प्रतिदिन से घटाकर अधिक दिन तक पहुंचने वाली गाड़ियों के चालकों के लिए 476 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया।

आवेदनकर्ता ने कहा है कि प्रबंधन द्वारा निर्धारित नई दर सरकार की न्यूनतम मजदूरी की तुलना में काफी कम है। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि चालकों से 24 घंटे तक काम लिया जाता है, जबकि इसके लिए संबंधित अनुमति नहीं ली गई है। आवेदन में श्रम कानूनों और न्यूनतम मजदूरी के प्रावधानों के अनुपालन की मांग की गई है।

बोनस और एरियर भुगतान का भी मुद्दा

चालकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बोनस के बजाय एक्स-ग्रेशिया देकर काम से संबंधित भुगतान किया जा रहा है। वहीं, जो चालक अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, उनके एक्स-ग्रेशिया भुगतान पर भी रोक लगाए जाने की बात आवेदन में कही गई है।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि एरियर के रूप में प्रति चालक लगभग 60 से 70 हजार रुपये का भुगतान कुछ चालकों को किया गया है, जबकि कई चालकों को यह राशि नहीं मिली है। इसके साथ ही टाटा मोटर्स द्वारा सभी चालकों को देने के लिए रेडियल रुपये के भुगतान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

पत्र में डीएलसी से यह भी पूछा गया है कि इंश्योरेंस, पीएफ, बैंक भुगतान और न्यूनतम मजदूरी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर पूर्व में उच्च न्यायालय, रांची में कोई फैसला हुआ है या नहीं। साथ ही आवेदन में उठाए गए बिंदुओं का समाधान कराने की मांग की गई है।

आवेदनकर्ता ने कहा है कि चालकों की समस्याओं का निष्पक्ष समाधान होने की उम्मीद है और इस दिशा में श्रम विभाग से आवश्यक हस्तक्षेप की अपेक्षा है।

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