
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा में धांधली के मामले में जेल में बंद पूर्व परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। रांची स्थित सीआईडी की विशेष अदालत ने उनकी जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद यह सख्त रुख अपनाया है, जिसके बाद श्वेता गुप्ता को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
सीआईडी ने अदालत के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए आरोपी पर बेहद गंभीर आरोप मढ़े हैं। जांच एजेंसी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि श्वेता गुप्ता ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मोबाइल ऐप व्हाट्सएप के जरिए परीक्षा की आंसर की लीक की थी। अपने दावों को सही साबित करने के लिए सीआईडी ने अदालत में लगभग 1000 पन्नों की एक विस्तृत केस डायरी सौंपी, जिसमें उनके खिलाफ जुटाए गए तमाम डिजिटल व कागजी सबूतों का ब्योरा शामिल है।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकील ने इन सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी मुवक्किल को इस मामले में घसीटा गया है और उनका इस गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
सीजीएल पेपर लीक में मास्टरमाइंड के करीबियों की जमानत पर फैसला सुरक्षित, अब तक 24 की गिरफ्तारी
इसी बीच, बहुचर्चित सीजीएएल फर्जीवाड़े से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में मुख्य साजिशकर्ता अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और उसके भाई अक्षय तिवारी की जमानत याचिकाओं पर भी अदालत में सुनवाई पूरी हो गई है। सीआईडी कोर्ट ने इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसका निर्णय जल्द आने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि जेपीएससी परीक्षा में हुई धांधली को लेकर सीआईडी ने केस दर्ज कर बड़े पैमाने पर जांच शुरू की थी। इसी कार्रवाई के तहत अगस्त महीने में श्वेता गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जांच एजेंसी लगातार इस गिरोह के तारों को तलाश रही है और इस पूरे मामले में अब तक 24 से अधिक आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

