Home » Jamshedpur News: घासी व आदिवासी सफाई कर्मियों को स्थायी करने की मांग, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

Jamshedpur News: घासी व आदिवासी सफाई कर्मियों को स्थायी करने की मांग, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

संगठन के अनुसार, टाटा कंपनी की स्थापना के शुरुआती दौर से ही घासी समाज और आदिवासी समुदाय के लोग सफाई व सैनिटेशन कार्यों से जुड़े रहे हैं।

by Mujtaba Haider Rizvi
jamshedpur dc office protest (1)
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jamshedpur : झारखंड एबोरिजिनल घासी ऑर्गनाइजेशन ने टाटा स्टील और उसकी विभिन्न इकाइयों में ठेका प्रथा के तहत साफ-सफाई और सैनिटेशन का काम कर रहे घासी व आदिवासी मजदूरों को स्थायी करने की मांग की है। संगठन ने इस संबंध में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र भेजकर हस्तक्षेप करने की अपील की है। यह पत्र पूर्वी सिंहभूम के डीसी राजीव रंजन के माध्यम से भेजा गया है।

संगठन का कहना है कि जमशेदपुर में टाटा स्टील की विभिन्न इकाइयों, कारखानों और लीज क्षेत्रों में लंबे समय से साफ-सफाई व सैनिटेशन का काम ठेका प्रथा के माध्यम से कराया जा रहा है। इनमें टीएमएच, टाटा मोटर्स अस्पताल, टिनप्लेट अस्पताल, टाटा मोटर्स कंपनी, जुबली पार्क और जुस्को के स्कूल क्षेत्रों सहित कई स्थान शामिल हैं। संगठन ने कहा कि सफाई और सैनिटेशन का काम स्थायी प्रकृति का है और इसे एक दिन भी बंद करने पर गंदगी व बीमारी फैलने की आशंका रहती है।

पीढ़ियों से सफाई कार्य से जुड़े हैं घासी समाज के लोग

संगठन के अनुसार, टाटा कंपनी की स्थापना के शुरुआती दौर से ही घासी समाज और आदिवासी समुदाय के लोग सफाई व सैनिटेशन कार्यों से जुड़े रहे हैं। संगठन ने दावा किया कि पूर्व में इन कार्यों में लगे मजदूर स्थायी होते थे और उन्हें आवास, बच्चों की शिक्षा तथा इलाज जैसी सुविधाएं मिलती थीं। पत्र में कहा गया है कि जमशेदपुर शहर के निर्माण और विकास के दौरान कोल्हान क्षेत्र के दूरदराज गांवों से घासी समाज के लोगों को सफाई और सैनिटेशन कार्यों के लिए लाया गया था। संगठन का दावा है कि तब से पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह समुदाय इस कार्य से जुड़ा रहा है और जमशेदपुर को स्वच्छ व विकसित शहर बनाने में उसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

ठेका प्रथा से शोषण का आरोप

संगठन ने वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों से एक ही तरह का काम करने वाले मजदूर अब ठेकेदारों के माध्यम से कार्यरत हैं। इससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक शोषण का सामना करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि पहले स्थायी कर्मचारियों को मिलने वाली आवास, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएं अब उपलब्ध नहीं हैं। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई परिवार आज भी पुराने टीन शेड वाले घरों में रह रहे हैं। पहले जब परिवार के सदस्य स्थायी कर्मचारी थे तो इन आवासों का रखरखाव टाटा प्रबंधन द्वारा किया जाता था और अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती थी।

मुख्यमंत्री से जांच और कार्रवाई की मांग

झारखंड एबोरिजिनल घासी ऑर्गनाइजेशन ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच कराने और साफ-सफाई एवं सेनिटेशन कार्यों में लगे बड़ी संख्या में घासी व आदिवासी मजदूरों को स्थायी करने के लिए टाटा स्टील प्रबंधन को आवश्यक निर्देश देने की मांग की है। संगठन ने कहा कि इस कदम से पीढ़ियों से सफाई कार्य में लगे परिवारों का भविष्य सुरक्षित होगा और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा। पत्र की प्रतिलिपि टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक को भी भेजी गई है। संगठन की ओर से सेमंत, शिरोज मुखी, रमेश मुखी, रवि मुखी और स्वयं मुखी समेत अन्य सदस्यों के नाम पत्र में शामिल हैं।

Read also Gurabanda Vehicle Theft Gang: गुड़ाबांदा में वाहन चोरी गिरोह का पर्दाफाश, 17 बाइक-स्कूटी के साथ तीन शातिर गिरफ्तार

Related Articles

Leave a Comment