
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मनीष कुमार ने तांतनगर प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय कोकचो एवं प्राथमिक विद्यालय गितिलादेर का निरीक्षण कर विद्यालयों में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों, आधारभूत सुविधाओं तथा मध्याह्न भोजन योजना के संचालन का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालयों में बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही शैक्षणिक एवं पोषण संबंधी सुविधाओं का बारीकी से अवलोकन करते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं शिक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मध्य विद्यालय कोकचो में उपायुक्त ने विभिन्न कक्षाओं में पहुंचकर अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने बच्चों से हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, सामान्य ज्ञान सहित विभिन्न विषयों से संबंधित प्रश्न पूछकर उनकी विषयगत समझ, सीखने की क्षमता एवं शैक्षणिक स्तर का आकलन किया। इस दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रश्नों के उत्तर दिए। उपायुक्त ने विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय आने, अनुशासन का पालन करने, पुस्तकों का नियमित अध्ययन करने तथा जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है और प्रत्येक विद्यार्थी को उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए।
प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति एवं क्षमता के अनुरूप शिक्षण कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश
उपायुक्त ने विद्यालय के शिक्षकों से भी शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की उपस्थिति, पाठ्यक्रम की प्रगति तथा सीखने के परिणामों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति एवं क्षमता के अनुरूप शिक्षण कार्य सुनिश्चित किया जाए तथा जिन विद्यार्थियों को किसी विषय में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता हो, उन्हें विशेष रूप से मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। उन्होंने विद्यालय में नियमित शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने तथा बच्चों में नवाचार, रचनात्मकता एवं नैतिक मूल्यों के विकास पर भी विशेष बल दिया।
डीसी ने मध्याह्न भोजन का स्वयं स्वाद लेकर उसकी गुणवत्ता, स्वाद, स्वच्छता एवं पोषण स्तर का आकलन किया
इसके उपरांत उपायुक्त ने प्राथमिक विद्यालय गितिलादेर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालय की पाकशाला का अवलोकन करते हुए भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, रसोईघर की स्वच्छता, खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण, पेयजल व्यवस्था एवं भोजन वितरण प्रणाली का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों के लिए तैयार किए गए मध्याह्न भोजन का स्वयं स्वाद लेकर उसकी गुणवत्ता, स्वाद, स्वच्छता एवं पोषण स्तर का आकलन किया। उन्होंने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना केवल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की योजना नहीं, बल्कि उनके बेहतर स्वास्थ्य, पोषण एवं विद्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए योजना के संचालन में गुणवत्ता एवं स्वच्छता के निर्धारित मानकों का हर हाल में पालन किया जाना चाहिए।
कक्षाओं की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं को भी देखा
निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने कक्षाओं की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों एवं विद्यालय प्रबंधन समिति को निर्देशित किया कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ, सुरक्षित एवं बच्चों के अनुकूल बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा किसी भी प्रकार की कमी पाए जाने पर उसका त्वरित निराकरण किया जाए।
उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन की प्राथमिकता सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर आधारभूत सुविधाएं एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। इसके लिए समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण कर शैक्षणिक गतिविधियों एवं विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की सतत समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा, पौष्टिक मध्याह्न भोजन एवं सकारात्मक शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित विभागों, शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन समितियों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सके।

