
दिल्ली : देश में निचली अदालतों में लंबित मामलों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। सरकार ने राज्यसभा में जानकारी दी कि पिछले 11 महीनों में लंबित मामलों में 9 लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। जनवरी 2024 तक जहां यह आंकड़ा 4.44 करोड़ था, वहीं 15 नवंबर तक यह बढ़कर 4.53 करोड़ हो गया।
11 महीने में 9.22 लाख मामलों की वृद्धि
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा को लिखित जवाब में बताया कि लंबित मामलों की संख्या में 9.22 लाख की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के अनुसार, 15 नवंबर तक निचली अदालतों में लंबित कुल मामलों में से 1.10 करोड़ दीवानी और 3.43 करोड़ आपराधिक मामले हैं।”
5 हजार 245 न्यायिक अधिकारियों की कमी
एक अन्य जवाब में केंद्रीय कानून मंत्री ने बताया कि जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका में 5,245 न्यायिक अधिकारियों की कमी है। उन्होंने कहा, “न्यायिक पदों की कमी और तेजी से बढ़ती लंबित मामलों की संख्या, न्याय प्रक्रिया में बड़ी चुनौती पैदा कर रही है।”
अधिकारियों की कमी एवं मामलों की बढ़ती संख्या का प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों की कमी और अदालतों में मामलों की धीमी सुनवाई के कारण न्यायिक प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है। इससे न्याय मिलने में देरी हो रही है और लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है। यह आंकड़ा केवल देश के न्यायिक तंत्र में सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है, जहां लंबित मामलों की संख्या न्यायिक सुधारों की मांग को और मजबूती प्रदान करती है।
राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड के आंकड़ों के अनुसार दीवानी और आपराधिक मामलों की स्थिति
–दीवानी मामले : 1.10 करोड़
– आपराधिक मामले : 3.43 करोड़
न्यायपालिका में सुधार की आवश्यकता
विशेषज्ञों का कहना है कि न्यायपालिका में डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग, न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति में तेजी और मामलों के निपटारे के लिए वैकल्पिक तंत्र अपनाने से इस समस्या का समाधान हो सकता है।

