पटना : बिहार में सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (CHO) की परीक्षा में पेपर लीक के मामले में बिहार पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) लगातार छापेमारी कर रही है। इस मामले में अब तक 36 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 5 महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को जेल भेज चुकी है, जबकि आर्थिक अपराध इकाई (EOU) एक आरोपी से पूछताछ कर रही है।
क्या है पूरा मामला
यह पेपर लीक मामला तब सामने आया, जब बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति (SHS) को इस पर शक हुआ और उन्होंने परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया। सोमवार (2 दिसंबर) को प्रेस रिलीज जारी कर समिति ने इसकी घोषणा की। समिति ने यह भी कहा कि परीक्षा की नई तारीख जल्द ही घोषित की जाएगी।
पुलिस को पेपर लीक की जानकारी तब मिली, जब पटना पुलिस ने 1 दिसंबर को 12 ऑनलाइन परीक्षा केंद्रों पर एक साथ छापेमारी की। पुलिस ने इन केंद्रों पर गड़बड़ी के साक्ष्य पाए, जिसके बाद परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया। दो परीक्षा केंद्रों को सील भी किया गया।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
अब तक पुलिस ने 36 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 5 महिलाएं भी हैं। SIT द्वारा की जा रही लगातार छापेमारी और जांच में और भी गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। आरोपियों में परीक्षा केंद्रों के संचालक, कुछ कर्मचारी और अन्य लोग शामिल हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि आर्थिक अपराध इकाई ने एक आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है।
आगे का रास्ता : क्या कह रही है बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति
बिहार राज्य स्वास्थ्य समिति ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे किसी भी नई जानकारी या अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर ध्यान रखें। समिति ने यह स्पष्ट किया कि जो उम्मीदवार परीक्षा में सम्मिलित होने वाले थे, वे न घबराएं और भविष्य में होने वाली परीक्षा के लिए तैयार रहें।
नेता-प्रतिपक्ष का सरकार पर हमला
इस पेपर लीक मामले को लेकर नेता-प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार की आलोचना की है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। तेजस्वी ने एनडीए सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार के संरक्षण में पेपर लीक माफिया सक्रिय हैं, जो हर बड़ी परीक्षा में गड़बड़ी कर रहे हैं और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि राज्य में होने वाली अधिकांश पेपर लीक घटनाएं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि आखिर वह इन घटनाओं पर कभी क्यों नहीं बोलते।
राज्य में बढ़ती पेपर लीक घटनाएं
बिहार में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों ने राज्य के शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को गंभीर सवालों के घेरे में डाल दिया है। इस मामले के बाद, राज्य के शिक्षा मंत्री और अन्य सरकारी अधिकारी इसे गंभीरता से लेकर और सख्त कदम उठाने की बात कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव का आरोप है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन घटनाओं पर खामोश रहते हैं, जबकि यह सीधे तौर पर उनकी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हैं।
बिहार में सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (CHO) की परीक्षा का पेपर लीक एक गंभीर मामला बन चुका है और पुलिस की कार्रवाई जारी है। इस पूरे मामले ने राज्य की परीक्षा प्रणाली पर उंगलियां उठाई हैं, खासकर पेपर लीक माफिया की सक्रियता को लेकर। बिहार के लोग और उम्मीदवार अब यह देखेंगे कि राज्य सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई सख्त उपाय किए जाएंगे।
Read Also- NEET : हाईब्रिड मोड में होगी नीट की परीक्षा, पेपर लीक से निपटने के लिए सरकार ने बनाई सुधार समिति

