नई दिल्ली : भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन के सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है। उन्हें तलाल अब्दो महदी की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई है। उन्हें बचाने के लिए भारत सरकार की ओर मदद का हाथ बढ़ाया गया है।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले लोकसभा में इस मामले के गूंजने के बाद जानकारी देते हुए बताया था कि मौत की सजा का मामला फिलहाल यमन की राष्ट्रपति के पास है। हालांकि, दया याचिका पर अभी तक राष्ट्रपति ने कोई कार्रवाई नहीं की है। वहीं, विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि वह यमन में मौत की सजा का सामना कर रही एक भारतीय नर्स के मामले में प्रासंगिक विकल्पों का पता लगाने के लिए हर संभव मदद कर रहा है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हमें यमन में निमिषा प्रिया की सजा के बारे में जानकारी है। हम समझते हैं कि प्रिया का परिवार प्रासंगिक विकल्पों पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा, सरकार इस मामले में हर संभव मदद कर रही है।
कौन हैं निमिषा प्रिया?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निमिषा केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली हैं। उन्हें 2017 में यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। वह 2012 में नर्स के तौर पर यमन गईं थीं। वहां 2015 में निमिषा और तलाल ने मिलकर एक क्लीनिक की शुरुआत की थी। परंतु, तलाल ने धोखे से क्लीनिक में अपना नाम शेयरहोल्डर के तौर पर शामिल करके आधी आय हड़पने की कोशिश की और खुद को निमिषा के पति के तौर पर पेश किया। जब निमिषा ने इस बारे में पूछताछ की तो दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। तलाल ने उसके साथ मारपीट और यौन शोषण करना शुरू कर दिया।
तलाल को दिया था नशीला इंजेक्शन
उत्पीड़न से तंग आकर निमिषा ने जुलाई 2017 में तलाल को एक नशीला इंजेक्शन दे दिया। जिससे उसकी मौत हो गई। निमिषा ने कहा कि उसका इरादा उसे मारने का नहीं था और वह सिर्फ तलाल के पास मौजूद अपने पासपोर्ट को वापस लेना चाहती थी।
निमिषा की मां प्रेमकुमार ने यमन जाकर अपनी बेटी को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की। लेकिन, यमन की निचली अदालत ने निमिषा को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। वहीं, यमन की सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
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