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Gorakhpur Zoo: गोरखपुर से इलाज के लिए भेजे गए बब्बर शेर पटौदी ने कानपुर में तोड़ा दम

पटौदी की साथी शेरनी मरियम की मृत्यु के बाद से वह अकेला और गुमसुम रहने लगा था। अक्सर वह अपने बाड़े के कोने में पड़ा रहता था।

by Anurag Ranjan
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गोरखपुर : चिड़ियाघर से इलाज के लिए कानपुर प्राणि उद्यान भेजे गए बब्बर शेर पटौदी की मौत गुरुवार को हो गई। उसकी मृत्यु के बाद कानपुर चिड़ियाघर में हड़कंप मच गया है। प्राथमिक आशंका बर्ड फ्लू से मौत की जताई जा रही है।

बीमार था पटौदी, उम्र और कमजोरी बनी कारण

शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान, गोरखपुर में पटौदी पिछले एक महीने से बीमार चल रहा था। उसकी खुराक लगभग आधी रह गई थी। सामान्यतः एक बब्बर शेर की औसत आयु 15 से 16 वर्ष होती है और पटौदी लगभग 15 वर्ष का हो चुका था।

उम्र बढ़ने के कारण वह हड्डी नहीं तोड़ पा रहा था, इसलिए उसे केवल बिना हड्डी वाला मांस ही दिया जा रहा था। जहां गर्मियों में बब्बर शेर को औसतन 10 से 12 किलो मांस दिया जाता है, पटौदी सिर्फ 4 से 5 किलो ही खा रहा था।

मरियम की मौत के बाद अकेला पड़ गया था पटौदी

पटौदी की साथी शेरनी मरियम की मृत्यु के बाद से वह अकेला और गुमसुम रहने लगा था। अक्सर वह अपने बाड़े के कोने में पड़ा रहता था। फरवरी 2021 में इटावा लायन सफारी से गोरखपुर चिड़ियाघर में पटौदी और मरियम दोनों को लाया गया था।

लगातार हो रही वन्यजीवों की मौत से चिंतित प्रशासन

चिड़ियाघर में लगातार हो रही वन्यजीवों की मौत के बाद पटौदी को बेहतर उपचार के लिए कानपुर चिड़ियाघर भेजा गया था। मगर तमाम प्रयासों के बावजूद पटौदी की जान नहीं बचाई जा सकी।

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