
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में गुरुवार को पेसा (PESA) नियमावली को लेकर एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के मंत्री रामदास सोरेन, दीपक बिरुवा, दीपिका पाण्डेय सिंह और शिल्पी नेहा तिर्की के साथ पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे एवंऔर राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के पूर्व अपर सचिव के. राजू की उपस्थिति थे।
नियमावली को बनाना है अनुकूल
कार्यशाला में विधायकों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य पेसा नियमावली को बेहतर, प्रभावी और राज्य की पारंपरिक ग्राम व्यवस्था के अनुकूल बनाना रहा।
सभी सुझावों को करेंगे शामिल
मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने कहा कि पेसा नियमावली को अंतिम रूप देने से पहले सभी सुझावों को गंभीरता से शामिल किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह नियमावली पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगी। वहीं, मंत्री रामदास सोरेन और दीपक बिरुवा ने कार्यशाला को उपयोगी बताते हुए कहा कि प्राप्त सुझावों से नियमावली को और सशक्त बनाया जा सकेगा। उन्होंने शीघ्र ही नियमों में संशोधन कर कानून को लागू करने की बात कही।
पारंपरिक ग्राम सभा की सराहना
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने पेसा नियमावली में सामूहिकता और समावेशी दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया। के. राजू ने झारखंड की पारंपरिक ग्राम सभा की सराहना करते हुए कहा कि पेसा नियमावली का निर्माण ग्राम स्तर के अंतिम व्यक्ति से संवाद कर किया जाए। उन्होंने अन्य राज्यों के सफल प्रावधानों को भी झारखंड में शामिल करने की सिफारिश की। कार्यशाला में पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे ने झारखंड में पेसा अधिनियम की आवश्यकता और प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। खूंटी जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने राज्य सरकार द्वारा तैयार ड्राफ्ट पेसा नियमावली 2024 का प्रस्तुतीकरण किया।

