Ranchi: झारखंड के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “समृद्ध एवं समावेशी झारखंड की ओरः दृष्टि और रणनीतियां” का शुभारंभ श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान (स्किपा) में हुआ। इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन डेवलपमेंट और स्किपा द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सम्मेलन में शीर्ष नीति-निर्माता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, शोधकर्ता और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि शामिल हुए।
नए रोडमैप पर जोर
आईएचडी के निदेशक प्रो आलख एन. शर्मा ने स्वागत भाषण में बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य झारखंड की अब तक की विकास यात्रा की समीक्षा कर आगे के लिए ठोस नीति-रोडमैप तैयार करना है। जिससे कि ग्रामीण-शहरी और आदिवासी-गैर आदिवासी असमानताओं को दूर किया जा सके। श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान के महानिदेशक डॉ. मनीष रंजन ने प्रमुख अतिथियों डॉ. मोंटेक सिंह अहलूवालिया और प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रो. एस महेंद्र देव का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन झारखंड के न्यायपूर्ण एवं तीव्र विकास के लिए दिशा तय करेगा।
रोजगार और समावेशन पर जोर
प्रो. महेंद्र देव ने कहा कि झारखंड ने जीएसडीपी और प्रति व्यक्ति आय में प्रगति की है। लेकिन औपचारिक रोजगार, महिला श्रम सहभागिता और गरीबी जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि खनिज और कृषि क्षेत्र झारखंड को तेजी से विकास देने की क्षमता रखते हैं। एमएसएमई, बड़े उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास समावेशी होना चाहिए, जिससे लाभ आदिवासी और कमजोर वर्गों तक पहुंचे। कृषि में सिंचाई, कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग और निर्यात क्षमता बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।
सत्र में द आदिवासीस ऑफ झारखंड इन सर्च ऑफ ए पीपलहुड पुस्तक का विमोचन भी किया गया। दूसरे सत्र में प्रोफेसर स्मिता सिरोही, डॉ अंजनी कुमार, प्रमोद कुमार ने कृषि विविधीकरण, सिंचाई की कमी, मूल्य श्रृंखला बाधाएं और पशुपालन की संभावनाओं पर म विस्तृत प्रस्तुति दी। वहीं तीसरे सत्र में आदिवासी समुदाय, लैंगिक असमानता, भूमि अधिकार, पोषण और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।

