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Jamshedpur Privet School News : जमशेदपुर के प्राइवेट स्कूल जाएंगे हाईकोर्ट, फीस बंद करने के फैसले को देंगे चुनौती

* बीपीएल बच्चों की फीस बंद करने के बाद शहर के प्राइवेट स्कूलों ने लिया निर्णय...

by Anand Mishra
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Jamshedpur (Jharkhand) : जमशेदपुर के प्राइवेट स्कूल प्रबंधन सरकार के फैसले के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। स्कूलों ने इस फैसले के खिलाफ अब झारखंड उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली है। इसे लेकर जमशेदपुर अनएडेड स्कूल एसोसिएशन झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करेगा।

क्या है मामला

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत शहर के प्राइवेट स्कूलों (Privet School) में पढ़ रहे बच्चों की फीस को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। राज्य सरकार ने जमशेदपुर स्थित प्राइवेट स्कूलों को इन बच्चों को पढ़ाने के एवज में फीस का भुगतान बंद कर दिया है। जानकारी के अनुसार, स्कूलों को बताया गया है कि उन्हें लीज पर जमीन मिली है। इसलिए अब फीस का भुगतान नहीं किया जाएगा। वहीं स्कूल संचालकों का कहना है कि जिस भूखंड पर स्कूल भवन व परिसर है, वह टाटा स्टील (Tata Steel) को सरकार से लीज पर मिला है। उसके बाद टाटा स्टील ने उन्हें वह भूखंड सब-लीज पर दिया है। सब-लीज का किराया एक रुपया ही सही, वे किराया तो दे रहे हैं। सरकार ने उन्हें यह भूखंड उपलब्ध नहीं कराया है। इसे लेकर स्कूल संचालकों का कहना है कि सरकार का यह निर्णय तर्कसंगत नहीं है।

स्कूल संचालकों ने कहा-पांच साल से फीस नहीं, अन्य समस्याएं भी

स्कूल संचालकों का कहना है कि राज्य में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 लागू होने के बाद कुछ साल तक उन्हें कोटे की सीटों पर नामांकन के बदले फीस का भुगतान किया गया। तब 425 रुपए प्रति छात्र फीस निर्धारित की गई थी। लेकिन, पिछले पांंच साल से न तो फीस का भुगतान किया गया है और न ही वृद्धि की गई है। जबकि, साल-दर-साल खर्च बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा आरटीई के तहत छह से 14 साल तक बच्चों को कोटे की सीट पर दाखिला देने का प्रावधान है। इसे बढ़ा कर तीन से 14 साल कर दिया गया है। आठवीं कक्षा तक बच्चे को फेल नहीं किए जाने के प्रावधान की वजह से अन्य बच्चों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।

हाईकोर्ट की शरण में जाना हमारी मजबूरी : बी चंद्रशेखरन

जमशेदपुर अनएडेड स्कूल एसोसिएशन के बी. चंद्रशेखरन ने कहा कि राज्य सरकार ने कोटे की सीटों पर पढ़ने वाले बच्चों की फीस बंद कर दी है। इस संबंध में उपायुक्त व जिला शिक्षा पदाधिकारी ने भी सरकार के आदेश को लेकर स्पष्ट कर दिया है। ऐसे में अब झारखंड हाईकोर्ट की शरण में जाना हमारी मजबूरी है। इस मसले को लेकर एसोसिएशन जल्द ही झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर करेगा।

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