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Koderma Fake kidnapping Case : जिसे समझा गया किडनैप, वो बहनोई के घर में छिपा था, कोडरमा पुलिस ने 6 घंटे में खोल दी सच्चाई

Jharkhand Hindi News : पुलिस ने कथित तौर पर अपहृत व्यक्ति को डोमचांच थाना लाकर पूछताछ शुरू की है। मामले में झूठी सूचना देने और कानून व्यवस्था को भ्रमित करने के पहलुओं की भी जांच की जा रही है

by Rakesh Pandey
Koderma Fake kidnapping Case
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कोडरमा : जिले के डोमचांच थाना क्षेत्र में दर्ज अपहरण का मामला पूरी तरह से मनगढ़ंत कहानी निकली। जिस युवक के बारे में समझा जा रहा था कि उसे किडनैप कर लिया गया है, वह अपने बहनोई के घर में छिपा हुआ था। शिकायत मिलने के मात्र 6 घंटे के भीतर ही उसको बरामद कर पुलिस ने ‘किडनैपिंग’ की पोल खोलते हुए सारी सच्चाई उजागर कर दी। जांच करने के बाद यह मामला आपसी लेनदेन और ट्रक बिक्री विवाद से जुड़ा पाया गया। लेनदेन का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में अपहरण की सूचना को भ्रामक और असत्य पाया है।

पत्नी ने थाने में दर्ज कराई थी शिकायत

महेशपुर की रहने वाली काजल देवी ने थाना में एक शिकायत दर्ज की थी कि उनका पति प्रकाश मेहता गत 7 फरवरी से लापता है। काफी खोजबीन की गई लेकिन उनका कोई अता-पता नहीं चला। बाद में काजल के पति ने ही गत मंगलवार को फोन पर बताया कि उसका अपहरण हो गया है और इसके साथ ही 15 लाख रुपये की फिरौती की मांग भी की गई है। इसके साथ ही प्रकाश ने बताया कि उसके गिरिडीह जिले के बगोदर थाना क्षेत्र के लक्षीबागी अटका गांव में रखा गया है। इसके बाद काजल ने डोमचांच थाना में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की गई।

पुलिस अधीक्षक ने गठित की विशेष टीम, खुल गई पोल

पुलिस अधीक्षक अनुदीप सिंह ने कहा कि उनके निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम गठित की गई। तकनीकी और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने घटना के छह घंटे के भीतर कथित अपहृत प्रकाश मेहता को उनके रिश्ते में बहनोई जयनारायण मेहता के घर से सुरक्षित बरामद कर लिया। इस बरामदगी ने अपहरण की कहानी पर संदेह को मजबूत किया। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि कोई वास्तविक अपहरण नहीं हुआ था। कथित अपहृत व्यक्ति सुरक्षित स्थान पर मौजूद था और सूचना भ्रामक थी। पुलिस ने प्रकाश मेहता को डोमचांच थाना लाकर पूछताछ शुरू की है। मामले में झूठी सूचना देने और कानून व्यवस्था को भ्रमित करने के पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

पूछताछ में क्या आया मामला सामने

पूछताछ के दौरान प्रकाश मेहता ने बताया कि जयनारायण मेहता के नाम से एक ट्रक था, जो उनकी पत्नी के नाम पर पंजीकृत था। उक्त ट्रक को एक एग्रीमेंट के तहत अशोक कुमार को बेचा गया था, जिसमें प्रकाश मेहता गवाह थे। तय समय पर भुगतान न होने के कारण मामला न्यायालय में लंबित है। इसी वित्तीय विवाद और भुगतान के दबाव से बचने के उद्देश्य से प्रकाश मेहता ने स्वयं के अपहरण की झूठी कहानी गढ़कर पत्नी को सूचना दी थी।

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