Chaibasa : जिस नमक के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आंदोलन चलाया था, उसी को यहां पैरों तले रौंदा जा रहा है। या फिर कचरे की तरह बाहर फेंक दिया जाता है। उचित मूल्य की राशन दुकानों में नमक का यही हाल हो रहा है। इसके भंडारण पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जाता है। दुकान संचालक केवल उन्हीं चीजों के भंडारण पर ध्यान दे रहे हैं, जिन पर उन्हें कमीशन मिलता है। नमक में एक पैसा भी कमीशन नहीं है, इसी कारण इसके भंडारण पर कोई जोर नहीं है।
खाद्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार राशन दुकान संचालकों को चावल और गेहूं के प्रति क्विंटल वितरण पर 150 रुपए कमीशन मिलता है। लेकिन एक राशन दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इसमें 55 रुपए से 60 रुपए तक खर्च हो जाता है। लेकिन 8 महीना से कमीशन भी नहीं मिला है। नमक और दाल पर कमीशन का प्रावधान नहीं है। इस तरह एक दुकान का मासिक पांच से सात हजार रुपए तक कमीशन बन जाता है। दुकान संचालकों को चावल, गेहूं और मिट्टी तेल में कमीशन मिलता है, इस कारण इनके सुरक्षित भंडारण का पूरा ध्यान रखा जाता है।
लेकिन, राज्य सरकार की अमृत नमक योजना को दुकान संचालक बर्बाद करने में लगे हैं। झारखंड सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों को घेंघा रोग से बचाने के लिए मुफ्त में आयोडीन युक्त नमक देती है। झारखंड सरकार के खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना के तहत गुलाबी कार्ड, पीला कार्ड और जरूरतमंद राशन कार्ड धारी को ये नमक मिलना है। लेकिन राशन दुकानों तक नमक पहुंच रहा है या नहीं। या इसका उठाव हो रहा है या नहीं। इसे कोई देखने वाला नहीं। नमक ग्राहकों तक पहुंचता है या नहीं, इसकी जांच नहीं हो रही है। द फोटोन न्यूज ने कुछ राशन दुकानों की हालत जानी तो पता चला कि अमृत नमक की हालत राशन दुकानों में ऐसी हो जाती है कि ग्राहक उसे मुफ्त में भी लेना पसंद नहीं करते हैं। जिस कारण से यह नमक गोदाम में ही खराब हो रहे हैं।
झींकपानी में फेंका गया साल 2016 का नमक
ताजा मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी प्रखंड कार्यालय का है। यहां आपूर्ति विभाग की लापरवाही से करीब लाखों रुपए का सरकारी नमक बर्बाद हो गया है। यहां झींकपानी प्रखंड आपूर्ति विभाग गोदाम में नमक के पैकेट्स बाहर ढेर में पड़े मिले। ज्यादातर पैकेट्स को चूहों ने कुतर दिया है। गीलेपन और नमी के कारण नमक ढेलों में बदल गया है। यहां साफ पता चल रहा है कि झारखंड सरकार का लाखों रुपया पानी में बर्बाद हुआ।
नमक एक्सपायरी है, मैंने विभाग को दी थी जानकारी : बीडीओ
झींकपानी प्रखंड विकास पदाधिकारी सीमा आइंन्द ने कहा वर्ष 2016 का नमक है जो एक्सस्पायर है। इसे लाभुक के बीच वितरण करना संभव नहीं है। नमक के एक्सपायरी होने की जानकारी विभाग को पत्राचार के जरिए दी गई थी। परंतु वहां से जवाब नहीं आया। बहरहाल अब सरकारी नमक एक्सपायर था, या नहीं। यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा। परंतु सरकारी पैसे से खरीदे गए नमक का बर्बाद होना और कूड़े के बोरों और पैकैट में फेंका जाना चिंता जनक है और सरकारी पैसे की क्षति भी है।
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