रांची। साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए रांची पुलिस ने अरगोड़ा निवासी विवेक नारसरिया को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि उसके नियंत्रण में संचालित एक फर्म के बैंक खाते का उपयोग डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था।
अलग-अलग राज्यों से जुड़े अब तक 11 मामलों का पता चला
सीआईडी के तहत संचालित साइबर थाना की जांच में यह पाया गया कि “मनीष फर्निशिंग” नामक कंपनी के खाते को म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इस खाते में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी। अब तक ऐसे 11 मामलों का पता चला है, जो अलग-अलग राज्यों से जुड़े हैं।
पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। मामले का खुलासा तब हुआ जब एचडीएफसी बैंक की अपर बाजार शाखा ने 9 फरवरी को संदिग्ध लेन-देन की जानकारी देते हुए साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाई।
वीडियो कॉल से बनाया जाता था दबाव
जांच में यह भी सामने आया है कि ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल करते थे। इस दौरान वे मनी लॉन्ड्रिंग या किसी अन्य गंभीर अपराध में फंसाने की धमकी देते थे और “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाते थे।
पीड़ितों को लगातार निगरानी में रखने का भ्रम पैदा कर उनसे तुरंत पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे। ठग इस राशि को “वेरिफिकेशन” या “सुरक्षित खाते” में जमा करने के नाम पर म्यूल खातों में डलवाते थे।
पुलिस ने की जागरूक रहने की अपील
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी स्थिति में फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर न करें। कोई भी सरकारी एजेंसी इस तरह की मांग नहीं करती और न ही डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई प्रक्रिया होती है।
संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना देने या आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की सलाह दी गई है। पुलिस मामले की आगे की जांच में जुटी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
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