जमशेदपुर : झारखंड के राज्य पोषित विश्वविद्यालयों में वित्त विभाग के आदेश की खुलेआम अवहेलना हो रही है। राज्य सरकार की ओर से 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को दोबारा सेवा में रखने के लिए बनाई गई गाइडलाइन का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। कोल्हान प्रमंडल के अंतर्गत दो सरकारी विश्वविद्यालयों में संविदा पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों की बहाली के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं।
एक तरफ जहां चाईबासा स्थित कोल्हान विश्वविद्यालय की ओर से गत 23 मार्च 2026 को आदेश जारी कर कहा गया कि विश्वविद्यालय के सिंडिकेट ने वित्त विभाग के आदेश का कड़ाई से पालन करने का निर्णय लिया है। इसके तहत सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की दोबारा नियुक्ति के लिए नियम स्पष्ट है। इसके तहत 65 वर्ष की उम्रसीमा तक ही कर्मचारियों को एक-एक वर्ष की अवधि के लिए अधिकतम तीन बार बहाल किया जा सकता है। इस नियमावाली का पालन सभी अंगीभूत कॉलेजों को करने के लिए कहा गया है।
वहीं जमशेदपुर स्थित जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में आधे दर्जन से अधिक कर्मचारियों को 65 वर्ष की उम्रसीमा के बाद भी सेवा में रखा गया है। बताया जा रहा है कि इन कर्मचारियों को यूनिवर्सिटी के जनरल फंड से मानदेय का भुगतान किया जा रहा है। सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि दोनों ही विश्वविद्यालयों में एवरग्रीन नाम की एजेंसी को ठेका देकर कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग के जरिए रखा गया है। यहीं नहीं यह दोनों प्रक्रिया वाइस चांसलर के रूप में डॉ अंजिला गुप्ता के पद पर रहते हुए अपनाई गई है।
जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी में यह कर्मचारी दे रहे सेवा
चंदन पॉल, पीके गिरी, स्वपना मंडल, सीमा कुमारी सिंह, प्रभा साहू और बसंती दास।
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