
Jamshedpur : झारखंड सरकार जहां आदिवासी छात्रों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पोटका विधानसभा क्षेत्र के गवालकाटा पंचायत स्थित सबरनगर आवासीय विद्यालय में व्यवस्थाओं की पोल उस समय खुल गई, जब पोटका विधायक संजीव सरदार ने शनिवार की सुबह औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि विद्यालय में रह रहे 248 आदिवासी छात्र बेहद खराब परिस्थितियों में जीवन जीने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हैं कि विधायक ने इसे “जेल से भी बदतर” बताया। स्थिति देखकर वे काफी भावुक और आक्रोशित नजर आए।
मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं, शौचालयों की हालत दयनीय
सुबह करीब 9 बजे जब विधायक विद्यालय पहुंचे, तब नाश्ते का समय था। लेकिन छात्रों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा था। बच्चों ने खुद विधायक को हॉस्टल और शौचालयों की स्थिति दिखाई। शौचालयों में गंदगी का अंबार था, जिससे पूरे परिसर में बदबू फैली हुई थी।
हॉस्टल के कमरों में न तो पंखे ठीक से चल रहे थे और न ही पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था थी। कई कमरों में बिस्तर तक अधूरे मिले।
बीमार पड़ रहे बच्चे, गर्मी में बेहाल हालात
छात्रों ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण उन्हें चर्म रोग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय का जेनरेटर पिछले छह वर्षों से खराब पड़ा है, जिससे बिजली की समस्या बनी रहती है।
खाने की गुणवत्ता भी बेहद खराब बताई गई। बच्चों ने आरोप लगाया कि दूध में पानी मिलाया जाता है और पोषक तत्वों की जगह सिर्फ चीनी दी जाती है। सब्जियों में खराब तेल का इस्तेमाल होता है।
बाहर से पानी लाने को मजबूर छात्र
छात्रों ने यह भी बताया कि खाना बनाने के लिए रसोइया उन्हें बाहर से पानी लाने के लिए कहता है। खेल सामग्री तक उपलब्ध नहीं है और कई बार बच्चे अपनी किताबें बेचकर फुटबॉल जैसे सामान खरीदते हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह रहा कि अगर छात्र किसी चीज की मांग करते हैं तो उनके भोजन में कटौती कर दी जाती है।
विधायक ने लगाई फटकार, सात दिन में सुधार का निर्देश
निरीक्षण के दौरान विधायक संजीव सरदार ने प्रधानाध्यापक शशिकांत पाठक और सुपरिटेंडेंट हेमंत कुमार को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने साफ निर्देश दिया कि सात दिनों के भीतर व्यवस्था में सुधार लाया जाए, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी जिला प्रशासन, विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि छह महीने के भीतर विद्यालय की स्थिति पूरी तरह बदल दी जाएगी।

