कोडरमा। पूर्व मध्य रेलवे ने ग्रैंड कॉर्ड रेलखंड के सबसे जटिल माने जाने वाले गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में महत्वपूर्ण तकनीकी सफलता हासिल की है। लंबे समय से चुनौती बने इस सेक्शन में पहली बार बीओबीआर (Bottom Open Bottom Release) रेक का सफल परीक्षण किया गया है। इससे मालगाड़ियों के परिचालन में तेजी आने और माल ढुलाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद बढ़ गई है।
कोयला, पत्थर,आयरन एवं अन्य खनिज पदार्थों की ढुलाई अधिक होने के कारण ग्रैंड कॉर्ड रेलखंड से रेलवे को अच्छी खासी आमदनी होती है। BOBR रेक के चालू होने के बाद इसकी आय और बढ़ जाएगी। ढुलाई में समय एवं लागत दोनों में कमी आएगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार को पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने प्रधान मुख्य परिचालन प्रबंधक इंदू रानी दुबे और धनबाद मंडल के डीआरएम अखिलेश मिश्रा के साथ डाउन लाइन में बीओबीआर रेक का फुटप्लेट निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परिचालन, सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
तकनीकी कारणों से बड़े वैगनों का संचालन नहीं था आसान
गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन को ग्रैंड कॉर्ड लाइन का सबसे कठिन हिस्सा माना जाता है। यहां 1:80 का तीखा ग्रेडिएंट, पहाड़ी इलाका, कई सुरंगें और ढलानदार ट्रैक होने के कारण बड़े वैगनों का संचालन आसान नहीं था। विशेष रूप से सुरंगों की ऊंचाई कम होने के कारण बीओबीआर रेक इस मार्ग से नहीं गुजर पाते थे।
रेलवे ने इस तकनीकी बाधा को दूर करने के लिए आईआईटी-आईएसएम धनबाद की मदद ली। विशेषज्ञों की सलाह पर सुरंगों का री-डिजाइन और आवश्यक डाइमेंशन विस्तार का कार्य पूरा किया गया। इसके बाद डाउन लाइन में खाली बीओबीआर रेक का सफल ट्रायल किया गया।
अधिकारियों ने इसे रेलवे परिचालन के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि इस पहल से भविष्य में कोयला और अन्य माल की ढुलाई अधिक तेज और सुगम होगी। साथ ही ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन की माल परिवहन क्षमता में भी बढ़ोतरी होगी।
क्या होती है BOBR रेक
इसके वैगन नीचे से खुलते हैं। माल उतारने के लिए ऊपर से खाली करने की जरूरत नहीं पड़ती। ट्रैक के ऊपर बने विशेष सिस्टम के जरिए नीचे की ओर गेट खुलते हैं और माल तेजी से गिर जाता है। इससे unloading में बहुत कम समय लगता है। जबकि सामान्य मालगाड़ी वैगनों में माल निकालने के लिए मशीन या मजदूरों की जरूरत पड़ती है। BOBR रेक में ऑटोमैटिक सिस्टम से माल खाली हो जाता है।
यह सेक्शन पहाड़ी और सुरंगों वाला कठिन इलाका है। BOBR रेक आकार में बड़े और भारी होते हैं, इसलिए यहां इनका संचालन तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था। अब इस रूट पर माल परिवहन अधिक तेज और आधुनिक तरीके से हो सकेगा।

