RANCHI: रांची नगर निगम ने शहर में संचालित आरओ वाटर प्लांट संचालकों के लिए सख्त निर्देश जारी कर दिया हैं। निगम की जलापूर्ति शाखा द्वारा जारी आम सूचना में कहा गया है कि शहर में बिना लाइसेंस के संचालित आरओ वाटर प्लांटों पर अब कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं 31 मई तक लाइसेंस नहीं लेने वाले प्लांटों को सील कर दिया जाएगा। बता दें कि नगर निगम द्वारा जारी सूचना के अनुसार झारखंड सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग की अधिसूचना के तहत झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 की धारा 204 एवं 209 के प्रावधानों के आलोक में आरओ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन और लाइसेंस नवीकरण के लिए नियमावली लागू है।
नोटिस के बाद भी नहीं दिखाया इंटरेस्ट
नियमावली के तहत रांची नगर निगम क्षेत्र में संचालित आरओ वाटर प्लांटों को लाइसेंस लेने को लेकर पहले भी कई बार सूचना प्रकाशित की जा चुकी है। निगम ने दैनिक अखबारों में सूचना प्रकाशित कर संचालकों को जरूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। इसके बाद कुछ संचालकों ने ही लाइसेंस लेने में इंटरेस्ट दिखाया। बाकी संचालकों ने अब तक लाइसेंस लेने की दिशा में कोई पहल नहीं की है। इसे देखते हुए निगम ने अंतिम चेतावनी जारी की है।
क्राइसिस के बीच संचालक मालामाल
सिटी में पानी की भारी किल्लत है। गर्मी के मौसम में हर घर में पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। वहीं ड्राई जोन वाले इलाकों में तो डीप बोरिंग कराने के बाद भी पानी नहीं मिल रही है। दूसरी ओर पानी का कारोबार करने वाले इस मौके का फायदा उठाकर मालामाल हो रहे हैं। भले लोगों के घरों की बोरिंग सूख चुकी हो, लेकिन पानी का कारोबार करने वाले लोगों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है। हर दिन पानी बेचकर संचालक बंपर कमाई कर रहे हैं। जार वाले पानी के लिए 10 रुपए से लेकर 50 रुपए प्रति जार तक वसूली हो रही है। वहीं घर या आफिस में डिलीवरी के लिए अलग चार्ज लिया जा रहा है।
गली-गली में चल रहे प्लांट
रांची के गली-गली में बॉटलिंग प्लांट खुल गए हैं, जो 800 से 900 फीट बोरिंग कर पानी का भयादोहन कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि बोरिंग के लिए पानी विक्रेता न तो कहीं से परमिशन ले रहे हैं और न ही नगर निगम से लाइसेंस। पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो 53 वार्डों में 318 बॉटलिंग प्लांट चल रहे थे। जहां डीप बोरिंग करवाकर प्रतिदिन बॉटलिंग प्लांट संचालक धरती का सीना चीरकर लाखों लीटर पानी निकाल रहे हैं। फिर इसे जार में भर कर बेच देते हैं। गर्मी में इसकी डिमांड बढ़ी हुई है। एक दुकानदार एक दिन में न्यूनतम पांच से दस हजार लीटर पानी बेचता है। इसके कारण भी कई मोहल्लों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

