RANCHI: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि एसआईआर के नाम से कांग्रेस को आखिर इतनी बेचैनी क्यों है? जबकि यह चुनाव आयोग द्वारा कराई जाने वाली एक नियमित और संवैधानिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के विरोध के पीछे केवल अपने घुसपैठिये फर्जी वोटरों को बचाना ही कांग्रेस का हिडन एजेंडा है। एसआईआर पर कांग्रेस की छटपटाहट की असली वजह को जनता बखूबी समझ रही है।
दरअसल एसआईआर होने से राज्य में वोट बैंक के लिए फर्जी तरीके से बसाए गए मतदाताओं का पत्ता साफ होना तय है, इसी चिंता से कांग्रेसी बौखलाए हुए हैं। अब राज्य में ये फर्जी और अयोग्य मतदाता किस दल के वोट बैंक है, ये किसके लिए चुनावी चूरन हैं, बतलाने की जरूरत नहीं है। कांग्रेस इस मामले को तूल देकर अपना हिडन एजेंडा को साध रही है। कांग्रेस झारखंड के मतदाताओं को दिग्भ्रमित और गुमराह कर इसे राजनीतिक रंग देने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि देश में एसआईआर क्या कोई पहली बार हो रहा है। चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए इस तरह का अभियान चलाया जाता रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मरे हुए, डुप्लीकेट या किसी दूसरे जगह जा चुके मतदाताओं के नाम हटाना और योग्य नए मतदाताओं का नाम जोड़ना होता है। साथ ही कहा कि दरअसल देश की चुनाव सुधार प्रक्रिया में एसआईआर एक पार्ट है। देश की आजादी के बाद से अब तक आठ बार किया जा चुका है। अधिकांश एसआईआर तो कांग्रेस के जमाने में ही हुआ तब उसका विरोध कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों ने क्यों नहीं किया? कांग्रेस इसे केवल राजनीतिक मुद्दा बना रही है। अंतिम बार एसआईआर 2004 में किया गया है।
मोदी सरकार तो 2014 में आई। इसके पूर्व जितने बार एसआईआर हुए, एक बार को छोड़कर सदैव देश में कांग्रेस या उनकी गठबंधन की ही सरकार देश में रही। तब इस नियमित एसआईआर पर किसी ने कभी आपत्ति नहीं जताई। आखिर अब केंद्र में मोदी सरकार के दौरान प्रक्रिया पर किसी को आपत्ति क्यों? एसआईआर एक ऐसा फिल्टर है जो हर राज्य में होना जरूरी है। झारखंड में किसी वास्तविक वोटर का नाम नहीं कटेगा। जो वास्तविक वोटर हैं, जो देश का नागरिक होने की अहर्ता रखते हैं उनमें कहीं कोई घबराहट नहीं है। घबराहट और बेचैनी कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों में है। जिस SIR को लेकर राहुल गांधी लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उनकी ही पार्टी के नेता शशि थरूर ने कहा है कि एसआईआर में फर्जी मतदाताओं के नाम हटने से केरल में कांग्रेस को फायदा हुआ है। इससे स्पष्ट होता है कि एसआईआर पर राहुल गांधी सिर्फ भ्रम और प्रोपेगेंडा फैलाने की राजनीति कर रहे हैं।

