रांची: झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने राज्य के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित प्रश्नोत्तर पुस्तिका का पहला भाग जारी किया है। इसमें आम लोगों, बूथ स्तरीय अधिकारियों तथा राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों द्वारा पूछे जा रहे 30 प्रमुख सवालों और उनके जवाबों को शामिल किया गया है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विभिन्न माध्यमों से प्राप्त जिज्ञासाओं और शंकाओं को ध्यान में रखते हुए यह जानकारी तैयार की गई है। इसका उद्देश्य मतदाताओं, बूथ स्तरीय अधिकारियों और अन्य संबंधित पक्षों को प्रक्रिया की स्पष्ट एवं सही जानकारी उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि प्रश्नोत्तर पुस्तिका में बूथ स्तरीय अधिकारी, बूथ स्तरीय अभिकर्ता, मतदाता सूची में शामिल तथा अभी तक सूची में शामिल नहीं हुए मतदाताओं की भूमिका और जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई है। इसके अलावा विशेष गहन पुनरीक्षण की आवश्यकता, दस्तावेजों की जरूरत, गणना प्रपत्र भरने की प्रक्रिया, प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन, दावा-आपत्ति की व्यवस्था तथा अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से जुड़ी जानकारियां भी शामिल हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि निर्वाचन विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया केवल भारतीय नागरिकों के लिए है और गलत घोषणा देना कानूनन दंडनीय है।
एसआईआर : मतदाताओं के सवाल, निर्वाचन आयोग के जवाब
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने प्रश्नोत्तर पुस्तिका का पहला भाग जारी किया है। इसमें 2003 की मतदाता सूची से मिलान, दस्तावेजों की आवश्यकता, अनमैप्ड मतदाता, महिलाओं, प्रवासी श्रमिकों और नागरिकता संबंधी प्रश्नों के जवाब दिए गए हैं।
2003 की मतदाता सूची से मैपिंग क्यों जरूरी, क्या हैं इसके फायदे
प्रश्न 1: 2026 की मतदाता सूची के मतदाताओं का 2003 की एसआईआर मतदाता सूची से मैपिंग क्या है?
उत्तर: मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए देश में अब तक लगभग 10 बार गहन पुनरीक्षण (इंटेंसिव रिवीजन) किया जा चुका है। झारखंड में अंतिम गहन पुनरीक्षण वर्ष 2003 में हुआ था। यदि किसी मतदाता का नाम उस सूची में दर्ज है, तो यह उसकी भारतीय नागरिकता के पूर्व सत्यापन का आधार माना जाता है। इसी कारण वर्तमान मतदाता सूची का मिलान 2003 की सूची से किया जा रहा है। बीएलओ मतदाताओं से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह मैपिंग करेंगे। जिन मतदाताओं की मैपिंग सफलतापूर्वक हो जाएगी और जिनके रिकॉर्ड में कोई विसंगति नहीं होगी, उन्हें गणना प्रपत्र के अलावा कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
प्रश्न 2: पिछली एसआईआर यानी 2003 की मतदाता सूची में अपना नाम कैसे खोजा जा सकता है?
उत्तर: मतदाता कई माध्यमों से 2003 की सूची में अपना नाम खोज सकते हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध “सर्च योर नेम इन ई-रोल पब्लिश्ड इन 2003” लिंक का उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा ईसीआईनेट (ECINET) ऐप डाउनलोड कर “पिछली एसआईआर में अपना नाम खोजें” मॉड्यूल के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर भी यह सुविधा उपलब्ध है। मतदाता को राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र, नाम, आयु और संबंधी का विवरण दर्ज करना होगा। संबंधित बीएलओ, एईआरओ और ईआरओ कार्यालयों में 2003 की मतदाता सूची की हार्ड कॉपी भी उपलब्ध है।
प्रश्न 3: 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग होने पर क्या लाभ मिलेगा?
उत्तर: यदि किसी मतदाता का नाम 2003 की मतदाता सूची से सफलतापूर्वक मिल जाता है, तो उसकी नागरिकता पहले से प्रमाणित मानी जाएगी। ऐसे मतदाता को केवल सही ढंग से भरा और हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र जमा करना होगा। उसका नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल रहेगा और सामान्यतः उसे कोई अतिरिक्त दस्तावेज नहीं देना होगा। केवल विसंगति पाए जाने पर ही नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही उसकी संतान की भी पैतृक आधार पर मैपिंग की जा सकेगी।
प्रश्न 4: पैतृक मैपिंग में तार्किक विसंगति या असंगति क्या होती है?
उत्तर: कई बार एक जैसे नाम और पिता के नाम वाले व्यक्तियों के कारण पहचान में भ्रम की स्थिति बन सकती है। बीएलओ द्वारा की गई मैपिंग के बाद ईसीआईनेट प्रणाली दोनों सूचियों के विवरणों का मिलान करती है और किसी भी प्रकार की असंगति को चिह्नित करती है। उदाहरण के तौर पर पिता और पुत्र की आयु में 15 वर्ष से कम का अंतर, दादा और पोते की आयु में 40 वर्ष से कम का अंतर, दोनों सूचियों में नाम या संबंध विवरण में अंतर जैसी स्थितियां तार्किक विसंगति मानी जाती हैं।
प्रश्न 5: अनमैप्ड मतदाता कौन हैं? क्या उनका नाम मतदाता सूची से हट जाएगा?
उत्तर: जिन मतदाताओं का नाम या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम 2003 की एसआईआर सूची से नहीं मिल पाता, उन्हें अनमैप्ड मतदाता माना जाता है। केवल अनमैप्ड होने के आधार पर किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। यदि वह निर्धारित गणना प्रपत्र भरकर जमा कर देता है, तो उसका नाम प्रारूप मतदाता सूची में बना रहेगा। हालांकि बाद में सत्यापन के दौरान उसे सहायक दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं।
प्रश्न 6: यदि किसी मतदाता की 2003 की सूची से मैपिंग हो गई है, तो क्या उसे दस्तावेज जमा करने होंगे?
उत्तर: नहीं। जिन मतदाताओं की स्वयं या पैतृक आधार पर मैपिंग हो चुकी है, उन्हें गणना चरण के दौरान किसी अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हें केवल सही ढंग से भरा हुआ और हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र तथा हालिया फोटो बीएलओ को उपलब्ध करानी होगी।
प्रश्न 7: क्या अनमैप्ड मतदाताओं को भी गणना प्रपत्र मिलेगा?
उत्तर: हां। वर्तमान मतदाता सूची में शामिल प्रत्येक मतदाता, चाहे वह मैप्ड हो या अनमैप्ड, को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। मतदाता को एक प्रति भरकर बीएलओ को जमा करनी होगी, जबकि दूसरी प्रति पावती के रूप में अपने पास रखनी होगी।
यह प्रारूप अखबार में “एसआईआर पर सवाल-जवाब” बॉक्स आइटम के रूप में प्रकाशित करने के लिए उपयुक्त है।

