
रांची: झारखंड में पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुके बच्चों को दोबारा स्कूल लाने के लिए आज 7 जुलाई से बड़ा अभियान शुरू हो रहा है। पूरे दो महीने अर्थात आगामी 7 सितंबर तक यानी मुहिम चलेगी। शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस अभियान का पूरा प्लान तैयार किया गया है। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 6 से 18 साल का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहे, इसके लिए व्यापक स्तर पर पहल करें।
अभियान के तहत रांची समेत राज्य के उन 39 प्रखंडों पर सबसे ज्यादा फोकस रहेगा, जहां स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या अधिक है या जहां नए एडमिशन कम हुए हैं। सरकार का लक्ष्य इन इलाकों को पूरी तरह से ‘जीरो ड्रॉपआउट’ बनाना है, यानी एक भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे।
शिक्षकों को मिली विशेष जिम्मेदारी
बच्चों को वापस स्कूल लाने के लिए शिक्षकों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे स्कूल के आखिरी पीरियड या खाली समय में बस्तियों और गांवों के घरों में जाकर सर्वे करेंगे। सिर्फ घर ही नहीं, बल्कि बस स्टैंड, ढाबों, होटलों और गैरेज जैसी जगहों की भी जांच होगी, ताकि वहां बाल मजदूरी कर रहे बच्चों को ढूंढकर उनका एडमिशन कराया जा सके।
बड़ें बच्चों के लिए ओपन स्कूलिंग
जो बच्चे ज्यादा बड़े हो चुके हैं और रेगुलर स्कूल नहीं जा सकते, उनके लिए भी सरकार ने रास्ता निकाला है। ऐसे बच्चों को NIOS यानी ओपन स्कूलिंग के जरिए आगे की पढ़ाई पूरी करने का मौका दिया जाएगा और उनके फॉर्म भरवाए जाएंगे। देवघर, धनबाद और रांची समेत 15 जिलों के शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे इस काम में स्थानीय लोगों और समाज की भी मदद लें।
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